By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
khojinarad HIndi Newskhojinarad HIndi Newskhojinarad HIndi News
  • उत्तराखण्ड
    • देहरादून
    • रुड़की
    • चमोली
    • रुद्रप्रयाग
    • टिहरी गढ़वाल
    • पौड़ी गढ़वाल
    • उत्तरकाशी
    • अल्मोड़ा
    • उधम सिंह नगर
    • चम्पावत
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • बागेश्वर
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्ली
    • पंजाब
    • महाराष्ट्र
  • अंतराष्ट्रीय
  • तत्काल प्रभाव
  • खोजी नारद कहिंन
  • तत्काल प्रभाव
  • More
    • बकैती
    • भांडा फोड़
    • लफ्फाज़ी
    • वीडियो
  • E-Paper
    E-PaperShow More
    E-Paper | 25 October 2026
    E-Paper | 25 October 2026
    October 24, 2026
    E-Paper | 11 October 2026
    E-Paper | 11 October 2026
    October 10, 2026
    E-Paper | 4 October 2026
    E-Paper | 4 October 2026
    October 3, 2026
    E-Paper | 27 September 2026
    E-Paper | 27 September 2026
    September 26, 2026
    E-Paper | 6 September 2026
    September 7, 2026
Reading: SelkuMelaUttarkashi : उत्तरकाशी में सेल्कू मेला क्यों मनाते हैं ?
Share
Notification Show More
Aa
khojinarad HIndi Newskhojinarad HIndi News
Aa
Search
  • उत्तराखण्ड
  • खोजी नारद कहिंन
  • तत्काल प्रभाव
  • इंटरव्यू
  • बकैती
  • भांडा फोड़
  • लफ्फाज़ी
  • वीडियो
Follow US
  • Advertise
© 2024 Khoji narad. All Rights Reserved.
khojinarad HIndi News > उत्तराखण्ड > SelkuMelaUttarkashi : उत्तरकाशी में सेल्कू मेला क्यों मनाते हैं ?
उत्तरकाशी

SelkuMelaUttarkashi : उत्तरकाशी में सेल्कू मेला क्यों मनाते हैं ?

प्रकृति को धन्यवाद देने का दिन हैं.

admin
Last updated: 2026/09/21 at 11:12 AM
admin
Share
4 Min Read
SelkuMelaUttarkashi
SelkuMelaUttarkashi : उत्तरकाशी में सेल्कू मेला क्यों मनाते हैं ?
SHARE
Highlights
  • सेल्कू मेला कैसे मनाया जाता है?
  • सेल्कू मेले का महत्व.
  • सोमेश्वर देवता की डोली, पांडव परंपराएं, लोकनृत्य और गांव की बेटियों की घर वापसी इस उत्सव को और भी खास बना देती है.

SelkuMelaUttarkashi : उत्तरकाशी में सेल्कू मेला क्यों मनाते हैं ? :-  उत्तराखंड की अनोखी लोकपरंपराओं में सेल्कू मेला प्रकृति, आस्था और सामुदायिक संस्कृति का अद्भुत संगम है। सेल्कू यानी “कौन सोएगा?” -और इसी भावना के साथ ग्रामीण पूरी रात लोकगीत, रासो-तांडी और पारंपरिक उत्सव में शामिल होते हैं। यह पर्व मानसून की हरियाली को विदाई और बुग्यालों में खिले ब्रह्मकमल सहित हिमालयी फूलों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक भी है। ग्रामीण इन फूलों को एकत्र कर स्थानीय देवताओं को अर्पित करते हैं और प्रकृति के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हैं।

Contents
प्रकृति को धन्यवाद देने का दिन हैंसेल्कू मेला कैसे मनाया जाता है?सेल्कू मेले का महत्व

प्रकृति को धन्यवाद देने का दिन हैं

सोमेश्वर देवता की डोली, पांडव परंपराएं, लोकनृत्य और गांव की बेटियों की घर वापसी इस उत्सव को और भी खास बना देती है। सेल्कू सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि उत्तराखंड की उस जीवंत संस्कृति की पहचान है, जहाँ प्रकृति, देवता और समाज एक साथ उत्सव मनाते हैं। उत्तराखंड के लोग मकर संक्रांति के अवसर पर प्रतिवर्ष सेल्कू मेला मनाते हैं। यह मेला उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के भाटवाड़ी के रायथल गांव में मनाया जाता है। मुखबा, घोरसाली, धराली, गंगोत्री और बूढ़ा केदार क्षेत्र में यह त्योहार आमतौर पर सितंबर के महीने में भाद्रपद मास (हिंदू कैलेंडर के अनुसार) में मनाया जाता है।

सेल्कू मेला कैसे मनाया जाता है?

मेले के दौरान राज्य के फूल ‘ब्रह्मकमल’ का अर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। बड़ी संख्या में लोग सोमेश्वर मंदिर में यह फूल तोड़कर अर्पित करते हैं। भक्त अपने परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं। उत्तरकाशी से कंदार देवता और खरासली मंदिर से सोमेश्वर देवता, माता जगदंबा जैसी अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को भी सजी हुई पालकियों में लाया जाता है।

हर्षिल, खरासली, मुखबा, झाला, सौर, लता, घोरसली, जसपुर, भीलंग बसई और धराली जैसे आसपास के गांवों के लोग भी इस मेले में पूरे उत्साह के साथ भाग लेते हैं। सेल्कू मेला ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है। इस मेले के माध्यम से स्थानीय लोग पूरे वर्ष, विशेष रूप से मानसून के दौरान, उन्हें सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए भगवान का धन्यवाद करते हैं। स्थानीय लोग इस जीवंत मेले को मनाकर मानसून को विदाई देते हैं।

सेल्कू मेले का महत्व

सेल्कू का शाब्दिक अर्थ है ‘सोएगा कौन’ (कौन सोएगा)। यह त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, जिसमें पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियाँ होती हैं और कोई भी नहीं सोता। श्रद्धालु मेले के रंगीन वातावरण में खो जाते हैं। ‘रासो’ और ‘तांडी’ जैसे लोकप्रिय नृत्यों में लोग पालकी के चारों ओर गोलाकार नृत्य करते हैं। ऐसा माना जाता है कि सेल्कू मेले के आयोजन का कारण तिब्बती व्यापार से जुड़ा है।

पुराने समय में, व्यापार करने वाले लोग नमक और आटा खरीदने के लिए तिब्बत जाया करते थे। तिब्बत से लोग यहाँ कोदो का आटा खरीदने आते थे। व्यापारियों की सुरक्षित वापसी और व्यापार की समृद्धि के लिए लोग रामेश्वर देवता के दर्शन करने और प्रार्थना करने के लिए आते थे। वे पूरी रात जागते थे और स्थानीय गायकों की धुन पर नाचते थे। आज भी यह मेला लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण और पूजनीय है।

You Might Also Like

UttarakhandPolitics : भाजपा ने निकाली लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ पदयात्रा

SonPapdi : दीपावली विशेष – भारत में कहां से आई सोन पापड़ी ?

UttarakhandNews : कॉस्ट बेनिफिट एनालिसिस जरूर करें अफसर – मुख्य सचिव

FreeNotebooks : 1.45 लाख विद्यार्थियों को मिलेंगी फ्री नोटबुक

NearDeathExperience : क्या सच में दूसरी दुनिया होती है?

TAGGED: #BrahmaKamal, #DevbhoomiUttarakhand, #HimalayanCulture, #khojinaradbreakingnews, #TraditionalFestival, IndianCulture, khojinarad, LocalFestival, RasoTandi, SelkuFestival, SelkuMela, SelkuMelaUttarkashi, SomeshwarDevta, trendingnews, UttarakhandCulture, UttarakhandTradition, uttarkashi

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.
[mc4wp_form]
By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
admin September 21, 2026 September 21, 2026
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article CockroachJanataParty CockroachJanataParty : कॉकरोच जनता पार्टी ने धामी सरकार को दी चेतावनी
Next Article IndiaBulletTrain IndiaBulletTrain : हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन बनाएगा भारत , रफ़्तार 350 किमी/घंटा

Advt.

Advt.

https://khojinarad.com/wp-content/uploads/2025/10/Vertical-V1-MDDA-Housing-1.mp4

Advt.

https://khojinarad.com/wp-content/uploads/2025/10/MDDA-Final-Vertical-2-1.mp4

Latest News

UttarakhandPolitics
UttarakhandPolitics : भाजपा ने निकाली लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ पदयात्रा
उत्तराखण्ड November 4, 2026
SonPapdi
SonPapdi : दीपावली विशेष – भारत में कहां से आई सोन पापड़ी ?
रेसिपी November 4, 2026
UttarakhandNews
UttarakhandNews : कॉस्ट बेनिफिट एनालिसिस जरूर करें अफसर – मुख्य सचिव
देहरादून November 4, 2026
FreeNotebooks
FreeNotebooks : 1.45 लाख विद्यार्थियों को मिलेंगी फ्री नोटबुक
उत्तराखण्ड November 4, 2026
//

Khoji Narad is a Uttarakhand-based news website that delivers comprehensive coverage of national and international news. With a focus on accurate, timely, and in-depth reporting, Khoji Narad offers insights into politics, business, culture, and more, while also highlighting the unique stories from the heart of Uttarakhand.

Quick Link

  • इंटरव्यू
  • खोजी नारद कहिंन
  • बकैती
  • भांडा फोड़
  • लफ्फाज़ी
  • वीडियो

Top Categories

  • उत्तराखण्ड
  • अंतराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • महाराष्ट्र

Contact

Smriti Sahgal (Editor)
Address: 207/4, Vijaypur, Gopiwala, Anarwala Dehradun-248001, Uttarakhand
Phone: 9837663626
Email: indiankhojinarad@gmail.com

 

khojinarad HIndi Newskhojinarad HIndi News
Follow US
© 2024 Khoji Narad. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Register Lost your password?