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प्रेग्नेंसी में हाई ब्लड प्रेशर को कैसे करें कंट्रोल? जाने एक क्लिक में...

Ways to control blood pressure during pregnancy.

प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड प्रेशर की समस्या की काफी खतरनाक हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि इस समस्या से बचा जाए और अगर हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो गई है तो भी इसे मैनेज करना जरूरी है।

जानकारी के अनुसार,,आइए जानते हैं प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए उन्होंने क्या बताया। ब्लड प्रेशर बढ़ने की समस्या काफी खतरनाक होती है।

इसकी वजह से सेहत को काफी नुकसान पहुंच सकता है और कुछ मामलों में स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंसी के दौरान खासतौर से हाइपरटेंशन से बचाव करना जरूरी होता है और अगर यह समस्या है भी तो इसे मैनेज करना बेहद जरूरी होता है।

गर्भावस्था के दौरान High BP की समस्या न केवल मां के लिए, बल्कि बच्चे के लिए भी काफी नुकसानदेह हो सकती है और अन्य परेशानियों का कारण बन सकती है।

इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान हाइपरटेंशन को मैनेज कैसे किया जाए, यह जानना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं प्रेग्नेंसी के दौरान कैसे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को मैनेज किया जा सकता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ने की वजह से मां के शरीर के कई अंग जैसे दिमाग, आंखों, हार्ट, लिवर, किडनी आदि प्रभावित होने लगते हैं। इतना ही नहीं, इसके कारण दिल की बीमारियों का खतरा, दौरा पड़ने की समस्या भी हो सकती है।

ब्लड प्रेशर बढ़ने की वजह से बच्चे तक ब्लड सप्लाई कम होने लगता है। इसके अलावा, बच्चे को पोषण कमी, विकास में रुकावट, वजन कम, समय से पहले डिलीवरी, जिसके कारण अन्य समस्याएं हो सकती हैं।

हाई ब्लड प्रेशर के कारण प्लासेंटा के आस-पास ब्लड इकट्ठा होने लगता है, जिसे प्लासेंटल अबरप्शियों कहते हैं। इसके कारण बच्चे की जान भी जा सकती है।

जाने कैसे इसे मैनेज करें?

नियमित ब्लड प्रेशर चेक करें। डॉक्टर से मिलकर नियमित समय पर जांच करवाना बेहद जरूरी है, ताकि ब्लड प्रेशर कितना है, यह पता चल सके और साथ ही, बच्चे का विकास कैसा हो रहा है, यह भी पता चलता रहता है। इसलिए डॉक्टर के साथ कोई भी अपॉइंटमेंट मिस न करें।

वजन नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। प्रेग्नेंसी के दौरान वजन बढ़ना सामान्य है, लेकिन यह भी एक हद तक होना चाहिए। ज्यादा वजन या ओवर वेट होने की वजह से हेल्थ से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं और हाइपरटेंशन की परेशानी और गंभीर हो सकती है। इसलिए हेल्दी वेट मेंटेन करने की कोशिश करें।

डाइट में प्रोसेस्ड फूड्स, ज्यादा तेल-मसाले वाला खाना नहीं खाना चाहिए। साथ ही, खाने में ज्यादा नमक नहीं डालना चाहिए। इससे ब्लड प्रेशर की परेशानी बढ़ सकती है।

डाइट में सब्जियां, फल, कम फैट वाला दूध, दही, लस्सी, साबुत अनाज आदि को सामिल करें। इससे ब्लड प्रेशर मैनेज करने में काफी मदद मिलेगी। साथ ही, मां और बच्चे को भरपूर पोषण भी मिलेगा।

फिजिकली एक्टिव रहने की कोशिश करें। इसके लिए आप अपने डॉक्टर से सलाह लेकर एक्सरसाइज कर सकते हैं, योग कर सकते हैं। इससे ब्लड प्रेशर निंयत्रित रहेगा और वजन भी कंट्रोल में रहेगा।

मेंटल हेल्थ का भी ख्याल रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए रोज मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग आदि करें। तनाव कम होने से भी ब्लड प्रेशर निंयत्रित रहता है।

रोज दिन में कम से कम दो घंटे आराम करें। साथ ही, रात को 7-8 घंटे की नींद लें। नींद की कमी के कारण भी हाइपरटेंशन की समस्या हो सकती है।

भरपूर मात्रा नें पानी पीएं। शरीर में पानी की कमी से बचने के लिए नारियल पानी, घर पर बने फ्रूट जूस आदि भी डॉक्टर की सलाह से ले सकते हैं।

डॉक्टर द्वारा बताए गए मल्टीविटामिन, आयरन आदि की दवाएं समय-समय पर लेनी चाहिए।

शराब और स्मोकिंग से बचें। शराब न पीएं और सेकंड हैंड स्मोकिंग से भी बचें।

डॉक्टर द्वारा दी गईं, ब्लड प्रेशर की दवाएं समय से लें।

जानकारी के अनुसार,, गर्भावस्था के 20वें हफ्ते के बाद से ब्लड प्रेशर बढ़ने की समस्या को Gestational Hypertension कहते हैं, जो डिलीवरी के कुछ समय बाद खुद ही ठीक भी हो जाता है।

इसके कारण महिला के हार्ट पर काफी जोर पड़ता है, क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान हार्ट सामान्यतौर से ज्यादा ब्लड पंप करता है।

इसके अलावा, प्लासेंटा का विकास और फंक्शन भी प्रभावित हो सकते हैं, जो शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है और डिलीवरी के दौरान समस्याएं भी हो सकती हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली High Blood Pressure की समस्या तीन प्रकार के हो सकते हैं।

क्रॉनिक हाइपरटेंशन : प्रेग्नेंसी से पहले या इसके शुरुआती स्टेज या 20 हफ्ते से पहले ब्लड प्रेशर बढ़ने की समस्या को क्रॉनिक हाइपरटेंशन कहते हैं। यह समस्या बच्चे की डिलीवरी के बाद भी बरकरार रहती है।

जेस्टेशनल हाइपरटेंशन : प्रेग्नेंसी के 20 हफ्ते के बाद होने वाली ब्लड प्रेशर की समस्या जेस्टेशनल हाइपरटेंशन कहलाती है। यह डिलीवरी के बाद ठीक हो जाता है।

प्रीएक्लेम्प्सिया : यह आमतौर पर प्रग्नेंसी के दूसरे चरण में शुरू होती है। यह शरीर के कई हिस्से, जैसे दिमाग, हार्ट, किडनी, लिवर और प्लासेंटा को प्रभावित कर सकता है।

यह कुछ मामलों में जानलेवा भी हो सकता है।

 

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