UttarakhandTourism : पर्यटन योजनाओं से मिल रही देवभूमि को नयी पहचान :- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में पर्यटन के क्षेत्र में होम स्टे एक वरदान साबित हो रहा है। अब तक राज्य में 6000 से अधिक पंजीकृत होम स्टे संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा इन गतिविधियों से युवाओं को रोजगार मिल रहा है। पिछले सप्ताह प्रदेश के 100 ट्रेकिंग मार्गों की GPS एवं GIS मैपिंग हेतु दलों को रवाना किया, जिनमें 50 मार्ग गढ़वाल और 50 मार्ग कुमाऊं के थे। इसके आधार पर एक मोबाइल ट्रेकिंग नेविगेशन ऐप और “द ट्रेक्स ऑफ उत्तराखंड” कॉफी टेबल बुक तैयार की जाएगी। सटीक जानकारी से ट्रेकिंग अधिक सुरक्षित होगी और इन ट्रेक पर विश्व भर के ट्रेकर्स तक पहुंचेंगे।
साहसिक पर्यटन आज उत्तराखंड की पहचान बन रहा है। 24 से 26 अक्टूबर तक होने वाली आदि कैलाश परिक्रमा 2.0 आदि कैलाश एवं ॐ पर्वत क्षेत्र की भव्यता को नई पहचान देगी। आदि कैलाश परिक्रमा रन और नीति वैली अल्ट्रा जैसे उच्च हिमालयी आयोजनों ने दिखाया है कि सीमांत गाँव विश्वस्तरीय गंतव्य बन सकते हैं, और इसका लाभ सीधे स्थानीय समुदायों को मिलता है। नवम्बर 2026 में होने वाली हिमालयन कार रैली इस कड़ी को आगे बढ़ाएगी।
इसके अलावा सरकार उत्तराखंड को बारहमासी पर्यटन गंतव्य भी बनाने के लगातार प्रयास कर रही है। शीतकालीन चारधाम यात्रा, स्नो ट्रेकिंग, एस्ट्रो टूरिज्म और वन्यजीव अनुभव हर मौसम में पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। नवम्बर में उत्तराखंड एकता नगर में भारत पर्व और लंदन में वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट के माध्यम से देवभूमि का संदेश देश और विश्व तक पहुंचाएगा।
उत्तराखंड को “भारत की आध्यात्मिक राजधानी” के रूप में स्थापित करने का रोडमैप तैयार करते हुए शाक्त, शैव, वैष्णव सर्किट, विवेकानंद, नरसिंह, गोल्ज्यू, गुरुद्वारा, नवग्रह, नागराजा, हनुमान और महासू देवता सर्किटों की स्थापना की जा रही है। सीमावर्ती गांवों में सड़क, 4जी, पेयजल, बिजली और अन्य आधारभूत सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिलेगी।

