KingBaliMantra : रक्षाबंधन पर क्यों पढ़ते हैं राजा बलि का मंत्र ? :- रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है. इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती है. वहीं, भाई भी अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि राखी बांधते समय एक विशेष मंत्र पढ़ने की परंपरा भी है? इस मंत्र में राजा बलि का नाम आता है।
राखी बांधते समय पढ़े जाने वाले इस मंत्र को लेकर धार्मिक मान्यता है कि यह भाई की रक्षा और उसके कल्याण की कामना से जुड़ा हुआ है. लेकिन आखिर रक्षाबंधन जैसे भाई-बहन के त्योहार में राजा बलि का नाम क्यों लिया जाता है? इसके पीछे भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और राजा बलि से जुड़ी एक बेहद रोचक पौराणिक कथा बताई जाती है. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
राखी बांधते समय पढ़ा जाता है राजा बलि का मंत्र
येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
इस मंत्र का अर्थ है कि जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली दानवराज राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं. हे रक्षासूत्र, तुम अपने संकल्प से कभी विचलित न होना और जिसकी कलाई पर बंधे हो, उसकी रक्षा करना. इस मंत्र में राजा बलि का नाम लेने के कारण इसे रक्षाबंधन की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।
राजा बलि का वर्णन हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं में एक शक्तिशाली और दानवीर राजा के रूप में मिलता है. वे असुर कुल में जन्मे थे, लेकिन भगवान विष्णु के परम भक्त माने जाते थे. राजा बलि अपनी दानशीलता के लिए प्रसिद्ध थे. कहा जाता है कि उनके दरबार से कोई भी व्यक्ति खाली हाथ वापस नहीं लौटता था. उनकी शक्ति और पराक्रम के कारण तीनों लोकों में उनका प्रभाव बढ़ने लगा था. राजा बलि के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए देवताओं को चिंता होने लगी. इसके बाद भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और राजा बलि की परीक्षा लेने के लिए उनके पास पहुंचे।
रक्षाबंधन से जुड़ी एक पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने राजा बलि को वरदान दिया था कि वे उनके साथ पाताल लोक में रहेंगे. भगवान विष्णु अपने भक्त राजा बलि की रक्षा के लिए उनके साथ रहने लगे. जब भगवान विष्णु लंबे समय तक वैकुंठ नहीं लौटे तो माता लक्ष्मी परेशान हो गईं. इसके बाद माता लक्ष्मी ने राजा बलि को अपना भाई बनाया और उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांध दिया।
इसके बाद राजा बलि ने माता लक्ष्मी से उपहार मांगने को कहा. तब माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को उनके साथ वैकुंठ वापस भेजने का वरदान मांगा. राजा बलि ने माता लक्ष्मी की इच्छा स्वीकार कर ली और भगवान विष्णु को उनके साथ वैकुंठ जाने की अनुमति दे दी. इसलिए इस कथा को रक्षाबंधन के पर्व से जुड़ी प्रमुख पौराणिक कथाओं में से एक माना जाता है।

