FashionGraveyard : दुनिया का ‘फैशन कब्रिस्तान’ कहां है? :- क्या आपने कभी सोचा है कि जब हमारे कपड़े पुराने होकर फट-गल जाते हैं तो उनका क्या होता है. वे कपड़े आखिर कहां चले जाते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया का वह ‘फैशन कब्रिस्तान’ दक्षिण अमेरिकी देश चिली के अटाकामा मरुस्थल (Atacama Desert) में स्थित है।
यह पृथ्वी के सबसे सूखे और बंजर इलाकों में से एक है. यह जगह चिली के उत्तरी शहर ‘ऑल्टो हॉस्पिसियो’ (Alto Hospicio) के ठीक बाहर स्थित है. इस जगह पर अब दुनियाभर से आए पुराने और फेंके हुए कपड़ों का विशालकाय पहाड़ खड़ा हो गया है।
60 हजार टन ‘कपड़ों का पहाड़’
इस जगह पर पूरी दुनिया से खराब और रिजेक्ट हुए 60 हजार टन कपड़ों का विशाल ढेर लग गया है. यह फैलाव इतना ज्यादा ज्यादा है कि इसे सैटेलाइट भी आसानी से देखा जा सकता है. उपग्रहों से धरती की निगरानी कर रहे वैज्ञानिकों ने जब रेगिस्तान में कपड़ों का विशाल ढेर देखा तो दंग रह गए. जो कपड़े कभी लोगों की शान हुआ करते थे, अब वही कपड़े रिजेक्ट होकर चिली के लिए बड़ा पर्यावरणीय बोझ बन चुके हैं।
चिली कैसे बना ‘वैश्विक सेकंड-हैंड कपड़ों’ का डंपिंग ग्राउंड?
अब सवाल उठता है कि आखिर इतने सारे देशों के कपड़े चिली के इस वीरान रेगिस्तान में पहुँचे कैसे? आखिर चिली ही इन रिजेक्टेड कपड़ों का बोझ क्यों उठा रहा है. क्या यह उसके लिए कोई सजा है या वहां की कानून-व्यवस्था इतनी खस्ता है कि दुनिया भर के कपड़ा उत्पादकों ने उसे डंपिंग ग्राउउंड बना दिया है।
असल में ऐसा कुछ भी नहीं है. पिछले कुछ दशकों में चिली इस्तेमाल किए गए (सेकंड-हैंड) कपड़ों के आयात का एक बहुत बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. हर साल यूरोप, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और एशिया के अलग-अलग हिस्सों से 60 हजार टन से भी ज़्यादा सेकंड-हैंड कपड़े जहाजों के ज़रिए चिली के उत्तरी बंदरगाह ‘इकीके’ (Iquique) पहुचते हैं. यहां का ‘फ्री-ट्रेड ज़ोन’ (मुक्त व्यापार क्षेत्र) आयात और निर्यात के नियमों को बेहद आसान बना देता है।
अनबिके कपड़ों को कोई नहीं खरीदता
यहाँ के स्थानीय व्यापारी इन कपड़ों की छंटाई करते हैं, उनकी गुणवत्ता के आधार पर उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटते हैं. इसके बाद पूरे लैटिन अमेरिका के खरीदारों को वे सेकंड हैंड कपड़े बेचे जाते हैं. यह कारोबार हज़ारों लोगों को रोज़गार देता है और सस्ते कपड़ों की तलाश करने वाले वर्ग के लिए एक बड़ा सहारा बनता है।
लेकिन असली मुश्किल तब खड़ी होती है जब इन कपड़ों का एक बड़ा हिस्सा बिक नहीं पाता. इसकी वजह वे कपड़े ट्रांसपोर्टेशन के दौरान ही खराब हो जाते हैं. उनमें से बहुत सारे कपड़े बेहद सस्ते और कमजोर धागों से बने होते हैं. ऐसे खराब कपड़ों को कोई खरीदना नहीं चाहता. इन अनबिके या खराब कपड़ों को वापस किसी देश में बेचना या कचरा प्रबंधन संयत्र में नष्ट करवाना कारोबारियों के लिए महंगा सौदा होता है. इसलिए वे इन अनचाहे कपड़ों को अवैध रूप से अटाकामा के रेगिस्तान में लाकर डंप कर देते हैं या उनमें आग लगा देते हैं।
लगातार ऊंचा होता कपड़ों का यह पहाड़
अटाकामा के रेगिस्तान में यह अवैध खेल सालों से चला आ रहा है. इसके चलते ऑल्टो हॉस्पिसियो शहर के आसपास के रेगिस्तान में ऐसे कपड़ों के कई विशालकाय कचरा-क्षेत्र बन चुके हैं. पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट हर बीतते दिन के साथ गंभीर होता जा रहा है।
हर साल जहाजों में भरकर कपड़ों की नई खेप आती है, जबकि इनमें से केवल नाममात्र के कपड़े ही रीसाइकल हो पाते हैं. पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक, अगरये कपड़े सूती या ऊनी जैसे प्राकृतिक रेशों के होते, तो शायद कुछ वर्षों में मिट्टी में सड़-गलकर समाप्त हो जाते. लेकिन आज के ज़माने के अधिकांश कपड़े पॉलिएस्टर, नायलॉन और एक्रिलिक जैसे सिंथेटिक मटीरियल से बने होते हैं, जो सीधे तौर पर पेट्रोलियम से तैयार किए जाते हैं।

