माता-पिता के इन शब्दों ने धनश्री को दिया हौसला :- भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल और उनकी पत्नी धनश्री वर्मा का रिश्ता अब आधिकारिक रूप से खत्म हो चुका है। 20 मार्च 2025 को मुंबई की पारिवारिक अदालत ने दोनों को तलाक दे दिया। यह रिश्ता 22 दिसंबर 2020 को शादी के साथ शुरू हुआ था और पांच साल बाद इसका अंत हो गया। इस अलगाव ने दोनों की निजी जिंदगी पर गहरा असर डाला है।
खास बात यह रही कि तलाक की अंतिम सुनवाई के दौरान युजवेंद्र “Be Your Own Sugar Daddy” टी-शर्ट पहनकर अदालत पहुंचे थे, जिस पर काफी चर्चा हुई। तलाक के बाद पहली बार धनश्री वर्मा ने अपनी चुप्पी तोड़ी और Humans of Bombay को दिए इंटरव्यू में अपने दिल की बात साझा की। उन्होंने बताया कि इस सफर को तय करना बेहद मुश्किल था। रिश्ते से अलग होने का फैसला किसी भी इंसान के लिए आसान नहीं होता, खासकर तब जब वह व्यक्ति एक मशहूर क्रिकेटर हो और पूरी दुनिया की नजरें आप पर हों।
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धनश्री ने माना कि इस प्रक्रिया में उन्होंने मानसिक और भावनात्मक तौर पर बहुत कुछ सहा। अदालत में फैसला सुनते समय वो खुद को संभाल नहीं पाईं और काफी रोईं। लेकिन इस कठिन दौर में उन्हें सबसे ज्यादा सहारा उनके माता-पिता से मिला। धनश्री ने साफ कहा कि “यह फैसला लेने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए। जब आप जानते हैं कि आपके सामने वाला आपसे ज्यादा शक्तिशाली और प्रभावशाली है, तब उस रिश्ते को खत्म करने का साहस जुटाना और भी मुश्किल हो जाता है।” उन्होंने आगे बताया कि उनके माता-पिता ने उन्हें हमेशा याद दिलाया कि यह कदम उनकी भलाई के लिए है।
उनके माता-पिता ने उन्हें रोज कहा कि उन्हें इस फैसले पर गर्व है और यही बातें धनश्री को मजबूत बनाती रहीं। धनश्री ने स्वीकार किया कि उनके माता-पिता ने ही उन्हें समझाया कि शादी से बाहर निकलना ही उनकी जिंदगी का सबसे समझदारी भरा निर्णय है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके माता-पिता का अटूट समर्थन उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं था। कठिनाई के इस दौर में वही उनकी ताकत बने और उन्हें याद दिलाते रहे कि जिंदगी को फिर से नए सिरे से जीना ही सबसे अच्छा विकल्प है।
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आज भले ही यह रिश्ता खत्म हो चुका है, लेकिन धनश्री ने साफ कहा कि वो हमेशा अपने माता-पिता की आभारी रहेंगी। उनके लिए यह तलाक केवल एक अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। युजवेंद्र और धनश्री दोनों अब अपनी-अपनी राहों पर आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि परिवार का साथ सबसे कठिन फैसलों को भी आसान बना देता है।

