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राष्ट्रीय

BirdFanciersLung : कबूतर खराब कर देंगे आपके फेफड़े, समझिए खतरा

एक स्टडी के अनुसार, फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लगभग 60-70% मरीजों में कबूतरों के संपर्क में आने का इतिहास पाया गया.

admin
Last updated: 2026/02/26 at 11:06 AM
admin
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4 Min Read
BirdFanciersLung
BirdFanciersLung : कबूतर खराब कर देंगे आपके फेफड़े, समझिए खतरा
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Highlights
  • फेफड़ों की गंभीर बीमारियां.
  • कबूतरों की वजह से स्वच्छता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया.
  • इनका मल बहुत ज्यादा एसिडिक होता है, जो इमारतों के पेंट, कंक्रीट और यहां तक कि लोहे के ढांचों को भी धीरे-धीरे गला देती है.

BirdFanciersLung : कबूतर खराब कर देंगे आपके फेफड़े, समझिए खतरा :-  आजकल भारतीय शहरों की ऊंची इमारतों, बालकनियों और पार्कों में कबूतरों का दिखना एक आम बात है। बहुत से लोग इन्हें दाना खिलाना पुण्य का काम समझते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनकी बढ़ती संख्या हमारी सेहत के लिए एक गंभीर चेतावनी है? ‘स्टेट ऑफ इंडियाज बर्ड्स 2023’ की हालिया रिपोर्ट एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश करती है।

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इस रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2000 के बाद से भारत में कबूतरों की तादाद में 150% से भी अधिक का उछाल आया है। सरल शब्दों में कहें तो पिछले 25-30 वर्षो के भीतर इनकी आबादी दोगुनी से भी ज्यादा हो चुकी है। उदाहरण के तौर पर, अकेले देश की राजधानी दिल्ली में ही लगभग 2 से 2.5 करोड़ कबूतर होने का अनुमान लगाया गया है। वैश्विक स्तर पर देखें तो दुनिया भर के 1 अरब से अधिक कबूतरों में से करीब 30 से 40 करोड़ अकेले भारत में ही मौजूद हैं। जहां एक ओर इन्हें दाना खिलाना एक धार्मिक और दयालु कार्य माना जाता है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नगर निगमों की रिपोर्ट्स इसे एक ‘साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी’ करार दे रही हैं।

फेफड़ों की गंभीर बीमारियां

मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, कबूतरों की मल और उनके झड़ते हुए पंखों में ‘एवियन एंटीजन’ नाम के बारीक कण होते हैं। जब यह गंदगी सूखती है, तो हवा के साथ मिलकर हमारे फेफड़ों में पहुंचती है। इस बीमारी का नाम है,’हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस‘ जिसे बर्ड फैंसीयर्स लंग भी कहते हैं। अगर समय से इसका पता न चले, तो यह फेफड़ों को स्थायी रूप से सुखा सकती है जिसे फाइब्रोसिस कहते हैं। इससे इंसान को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर तक की जरूरत पड़ सकती है।

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हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस: एक स्टडी के अनुसार, फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लगभग 60-70% मरीजों में कबूतरों के संपर्क में आने का इतिहास पाया गया है। पशु चिकित्सा वैज्ञानिकों की रिपोट्स बताती है कि कबूतरों के मल में लगभग 60 तरह के अलग-अलग रोगजनक पाए जाते हैं, जो इंसान को बीमार कर सकते हैं। बर्ड फैंसीयर्स लंग एक स्थिति है जहां कबूतरों के मल के बारीक कण फेफड़ों में स्थायी घाव बना देते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।

कबूतरों की वजह से स्वच्छता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इनका मल बहुत ज्यादा एसिडिक होता है, जो इमारतों के पेंट, कंक्रीट और यहां तक कि लोहे के ढांचों को भी धीरे-धीरे गला देती है। बालकनी में जमा गंदगी न केवल बदबू फैलाती है, बल्कि वहां अन्य हानिकारक कीटों और चूहों को भी आकर्षित करती है, जिससे घर का पूरा वातावरण दूषित हो जाता है।

इस समस्या से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह कि हम अपने घर के आसपास सफाई रखें। अपनी बालकनी या खिड़कियों पर जाली लगवाना एक बहुत अच्छा उपाय है ताकि कबूतर वहां अपना घोंसला न बना सकें। साथ ही, अपने घर के एकदम पास उन्हें दाना डालने से बचना चाहिए। अगर आपको कभी कबूतर की गंदगी साफ करनी पड़े, तो हमेशा चेहरे पर मास्क जरूर पहनें ताकि धूल के बारीक कण आपके शरीर के अंदर न जा सकें।

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