IranIsraelWar : ईरान बनाम इजरायल। कभी दोस्त रहे ये दो देश आखिर कैसे बन गए कट्टर दुश्मन? :- नमस्कार! आप देख रहे हैं खोजी नारद… और आज बात उस जंग की जिसने एक बार फिर मिडिल ईस्ट को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है — ईरान बनाम इजरायल। कभी दोस्त रहे ये दो देश आखिर कैसे बन गए कट्टर दुश्मन? और क्यों भड़क उठी है ये नई जंग? आइए समझते हैं इस पूरे घटनाक्रम को, इतिहास से लेकर आज की ताज़ा तस्वीर तक — एक खास न्यूज़ पैकेज में।
ताज़ा हालात: जंग की चिंगारी से भड़की आगहालिया घटनाओं में इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने मिलकर ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़ा हवाई अभियान चलाया। तेहरान, इस्फहान, कोम और तबरीज जैसे शहर निशाने पर रहे।
दावा किया गया कि इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई।इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और कतर में मौजूद अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
मिडिल ईस्ट एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ा है। 1948 में इजरायल के गठन के बाद अधिकांश मुस्लिम देशों ने उसे मान्यता देने से इनकार कर दिया। लेकिन ईरान ने पर्दे के पीछे उससे संबंध बनाए रखे।उस समय ईरान में शाह मोहम्मद रेजा पहलवी का शासन था। वे पश्चिमी देशों और अमेरिका के करीबी थे।
इजरायल के पहले प्रधानमंत्री डेविड बेन-गुरियन ने “पेरिफेरी डॉक्ट्रिन” अपनाई — यानी अरब देशों से घिरे इजरायल ने गैर-अरब देशों (जैसे ईरान और तुर्की) से रणनीतिक साझेदारी की। ईरान इजरायल को तेल देता था, दोनों देशों के बीच खुफिया और सैन्य सहयोग भी था। 1979: इस्लामिक क्रांति और दुश्मनी की शुरुआतसबकुछ बदल गया 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद।
शाह का तख्तापलट हुआ और आयातुल्लाह रूहोल्लाह खोमेनी के नेतृत्व में इस्लामिक रिपब्लिक की स्थापना हुई। नई हुकूमत ने इजरायल को “फिलिस्तीनी जमीन पर कब्जा करने वाला राष्ट्र” बताया और अमेरिका को “ग्रेट सैटन” कहा। यहीं से दोस्ती दुश्मनी में बदल गई।
प्रॉक्सी वॉर और न्यूक्लियर तनाव
इजरायल का आरोप है कि ईरान गाजा में हमास और लेबनान में हिज्बुल्लाह को समर्थन देता है वहीं इजरायल ने कई बार ईरान के परमाणु ठिकानों और वैज्ञानिकों को निशाना बनाया. इजरायल को डर है कि अगर ईरान परमाणु हथियार बना लेता है, तो उसका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
अब क्यों भड़की जंग?
ईरान का बढ़ता परमाणु कार्यक्रम.
मिडिल ईस्ट में वर्चस्व की लड़ाई.
अमेरिका और इजरायल की सुरक्षा चिंताएं.
प्रॉक्सी ग्रुप्स के जरिए अप्रत्यक्ष हमले.
अब यह टकराव सीधे सैन्य संघर्ष में बदलता दिख रहा है।
1948 के बाद ईरान-इजरायल संबंध
1979 की इस्लामिक क्रांति का प्रभाव
ईरान का न्यूक्लियर कार्यक्रम
मिडिल ईस्ट की जियो-पॉलिटिक्स और प्रॉक्सी वॉर
तो कुल मिलाकर, दोस्ती से दुश्मनी तक का यह सफर सिर्फ दो देशों की कहानी नहीं है, बल्कि मिडिल ईस्ट की बदलती राजनीति, धार्मिक विचारधाराओं और वैश्विक ताकतों की रणनीति का परिणाम है।
क्या यह संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध में बदलेगा? क्या वैश्विक शक्तियां इसमें खुलकर उतरेंगी? इन सवालों के जवाब आने वाला वक्त देगा।

