TVDebate : TV डिबेट में अभद्र भाषा और आपत्तिजनक बयान पर लगाम ! :- टीवी न्यूज चैनलों की डिबेट में अभद्र भाषा, भड़काऊ बयानों और सनसनीखेज रिपोर्टिंग पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने नई एडवाइजरी जारी कर चैनलों को कार्यक्रमों के प्रसारण के दौरान प्रभावी संपादकीय नियंत्रण रखने की सलाह दी है। इसके तहत बहस में किसी प्रतिभागी के आपत्तिजनक बयान देने पर उसकी आवाज तुरंत म्यूट करने, जरूरत पड़ने पर कार्यक्रम रोकने, डिस्क्लेमर देने या प्रसारण की फीड काटने जैसे कदम उठाने को कहा गया है। मंत्रालय ने न्यूज रिपोर्टिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), खासकर जनरेटिव एआई के इस्तेमाल को लेकर भी सतर्कता बरतने की हिदायत दी है।
बहस में शामिल होने वालों के चयन पर फोकस
मंत्रालय ने टीवी चैनलों की ओर से कार्यक्रम संहिता के कथित उल्लंघन पर चिंता जताई है। एडवाइजरी में कहा गया है कि डिबेट और दूसरे कार्यक्रमों में शामिल होने वाले पैनलिस्टों तथा प्रतिभागियों का चयन सावधानी से किया जाना चाहिए। उन्हें पहले से तैयार करने और कार्यक्रम के दौरान निगरानी रखने जैसी संपादकीय व्यवस्थाएं भी मजबूत होनी चाहिए।
इसका उद्देश्य अपमानजनक, अभद्र, गाली-गलौज वाली या भड़काऊ सामग्री के प्रसारण को रोकना है। खास तौर पर ऐसी बहसों में सतर्क रहने को कहा गया है जिनमें सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका हो। यदि कोई प्रतिभागी आपत्तिजनक टिप्पणी करता है तो चैनल को स्थिति के अनुसार तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
न्यूज चैनलों पर ग्राफिक्स तैयार करने, वर्चुअल न्यूज प्रस्तुत करने और अन्य प्रसारण संबंधी कामों में एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है। मंत्रालय ने इस तकनीक के उपयोग में सावधानी बरतने को कहा है। चैनलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई की मदद से तैयार की गई सामग्री दर्शकों को भ्रमित न करे और कार्यक्रम संहिता के अनुरूप हो।
एडवाइजरी में सुरक्षा बलों की ओर से चलाए जा रहे आतंकवाद विरोधी अभियानों के सीधे प्रसारण पर लागू प्रतिबंध को भी दोहराया गया है। मंत्रालय ने कहा है कि अभियान समाप्त होने तक कवरेज अधिकृत अधिकारी की ओर से समय-समय पर दी जाने वाली जानकारी तक सीमित रखा जाना चाहिए। इसका मकसद अभियान से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के प्रसारण से बचना है।
इसके अलावा अपराध, हिंसा, प्राकृतिक आपदाओं और बड़ी दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग में सनसनी फैलाने से परहेज करने को कहा गया है। परेशान करने वाले दृश्यों को सावधानी से दिखाने और उन्हें बार-बार या लूप में प्रसारित नहीं करने की सलाह दी गई है। आपदाओं और बड़े हादसों की खबरें सत्यापित तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर फुटेज पर तारीख और समय भी प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

