UttarakhandHighCourt : ‘सहमति से बना रिश्ते बलात्कार नहीं’ :- अगर दो वयस्कों (एडल्ट) के बीच संबंध आपसी सहमति से बने हों, तो बाद में शादी से इनकार करना स्वतः ही दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता. नैनीताल हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकल पीठ ने कहा कि आपराधिक कानून का उपयोग व्यक्तिगत प्रतिशोध लेने या असफल रिश्तों के निपटारे के लिए नहीं किया जाना चाहिए. आपको बता दें कि हाईकोर्ट ने फौज के एक जवान के खिलाफ दर्ज अपहरण और दुष्कर्म के मुकदमे को इसके बाद रद्द कर दिया है।
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पढ़िए आखिर मामला क्या था
पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग थाने में साल 2022 में एक युवती ने एक युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया था जिसमें आरोप लगाया गया कि युवक ने शादी का झांसा देकर युवती को उसके घर से बाहर बुलाया और एक होटल में ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए. बाद में जब आरोपी ने शादी करने से इनकार कर दिया, तो युवती ने उसके खिलाफ धारा 366 (अपहरण) और 376 (दुष्कर्म) के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया था।
अदालत ने मामले के दस्तावेजों और पीड़िता के बयानों का गहन अध्ययन करने के बाद पाया कि दोनों पक्ष 2019 से एक-दूसरे को जानते थे और सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क में थे. न्यायालय ने टिप्पणी की कि पीड़िता अपनी मर्जी से अपना घर छोड़कर आरोपी के साथ गई थी. ऐसे में अपहरण (धारा 366) का कोई भी आवश्यक तत्व यहां मौजूद नहीं था. क्योंकि युवती एक वयस्क थी और उसने अपनी मर्जी से साथ जाने का फैसला किया था।
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न्यायमूर्ति आशीष नैथानी ने अपने फैसले में कहा कि शादी के वादे पर बने यौन संबंध तभी दुष्कर्म माने जा सकते हैं, जब यह साबित हो कि आरोपी की नीयत शुरू से ही धोखा देने की थी. वर्तमान मामले में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह लगे कि आरोपी ने शुरू से ही शादी न करने के इरादे से सहमति प्राप्त की थी।
अदालत ने माना कि एक असफल रिश्ते और धोखाधड़ी के बीच स्पष्ट अंतर होता है.बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि यह दो वयस्कों के बीच एक सहमतिजन्य रिश्ता था, जिसे गलत तरीके से पेश किया गया।

