EkPedMaaKeNaam : माँ के पेड़ों से महकेगी भीमताल झील ! :- पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में भीमताल झील के किनारे कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा , कमिश्नर ,डीएम , और सीडीओ अरविंद पांडे ने एक पेड़ मां के नाम से (नागिन्दी पांडेय) वृक्षारोपण किया। तथा भीमताल झील के सौंदर्यीकरण (बोगनवेलिया) से आरंभ किया गया।
इस दौरान कुमाऊं आयुक्त व सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत द्वारा अपनी माता सावित्री रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल द्वारा अपनी माता उमा देवी रयाल, मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं तेजस्विनी अरविंद पाटील द्वारा अपनी माता स्व. मीना अरविंद पाटील की स्मृति में तथा मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पाण्डे द्वारा अपनी माता नागिन्दी पाण्डे, वन संरक्षक नितीश मणि त्रिपाठी द्वारा अपनी माता नीलम मणि त्रिपाठी के नाम से पौध रोपित किया गया।
इसके पहले नैनीताल पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भीमताल में झील सौंदर्यीकरण अभियान कार्यक्रम में भीमताल झील परिक्षेत्र में पौध रोपण किया। इस दौरान उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस की बधाई देते हुए पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति संकल्पबद्ध होकर कार्य करने का आह्वान किया । मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की संस्कृति और जीवन शैली का प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव रहा है। हमारे लोकपर्व, परम्पराएं और जनजीवन सदैव पर्यावरण संरक्षण के मूल्यों को सुदृढ़ करते रहे हैं। यह दिवस प्रकृति के प्रति हमारी आस्था और संरक्षण की भावना को प्रदर्शित करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें एकजुट होकर प्रकृति के संरक्षण की दिशा में भी चिन्तन करना होगा। उन्होंने कहा कि नैनीताल जिला झीलों के नाम पर विश्वविख्यात है, यहॉं देश विदेश से वर्षभर पर्यटक आते हैं। झीलों का संरक्षण व संवर्धन सरकार की प्राथमिकता में है। इसी उद्देश्य से भीमताल झील किनारे फूलों के पौधे रोपित करने के साथ ही इसका सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यहां की झीलों की देश-विदेश में विशिष्ट पहचान है। राज्य सरकार इस धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है।पर्यटकों के घूमने-फ़िरने की जगहें।
खूबसूरत भीमताल से जुडी दिलचस्प जानकारी –
भीमताल उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित एक झील-नगरीय शहर है, जो लोकप्रिय पहाड़ी स्टेशन नैनीताल से सटा हुआ है । भीमताल समुद्र तल से 4706 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह इतिहास से ओतप्रोत एक मनमोहक स्थल है। इस भव्य शहर का नाम महाभारत के पांडव भाइयों में से एक भीम के नाम पर रखा गया है । ऐसा माना जाता है कि वनवास के दौरान पांडव प्यास बुझाने के लिए इस क्षेत्र में आए थे, लेकिन उन्हें पानी नहीं मिला।
तब पांडवों में सबसे बलवान भीम ने अपनी गदा से जमीन पर प्रहार किया और भूमिगत जल के लिए एक मार्ग बनाया, जिससे अंततः भीमताल झील का निर्माण हुआ। भीमताल को नैनीताल से भी पुराना माना जाता है, क्योंकि कुमाऊं पहाड़ियों, काठगोदाम, नेपाल और तिब्बत को जोड़ने वाली इसकी सड़क विश्व प्रसिद्ध प्राचीन रेशम मार्ग का हिस्सा मानी जाती है ।
सी-आकार की भीमताल झील कुमाऊं क्षेत्र की सबसे बड़ी झील है , जिसके केंद्र में एक छोटा सा द्वीप है। द्वीप पर स्थित खूबसूरत बड़ा एक्वेरियम एक दर्शनीय स्थल है, जहां कई पर्यटक आते हैं। झील के अंत में विक्टोरियन बांध है , जिसका निर्माण अंग्रेजों ने 19वीं शताब्दी में करवाया था।
बांध के चारों ओर सीढ़ीदार फूलों का बगीचा है, जो देखने वालों के लिए एक मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है। भीमताल झील के किनारे भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन भीमेश्वर महादेव मंदिर है । मंदिर के पीछे गर्ग पर्वत है, जो गार्गी नदी (स्थानीय रूप से गोला नदी के नाम से जानी जाती है ) का उद्गम स्थल है ।

