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अंतराष्ट्रीय

WaterCrisis2060 : क्या 2060 तक सूख जाएंगे दुनिया के बड़े बांध ?

पहली बार तैयार हुआ छोटे जलाशयों का वैश्विक डेटाबेस.

admin
Last updated: 2026/06/06 at 11:35 AM
admin
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4 Min Read
WaterCrisis2060
WaterCrisis2060 : क्या 2060 तक सूख जाएंगे दुनिया के बड़े बांध ?
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Highlights
  • हर दशक में घट रही है जल संग्रहण क्षमता.
  • सूखे क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बढ़ा खतरा.
  • रिसर्च में सामने आया है कि जलाशयों की पानी संग्रह करने की क्षमता औसतन हर दस साल में 7.3 प्रतिशत तक कम हो रही है.

WaterCrisis2060 : क्या 2060 तक सूख जाएंगे दुनिया के बड़े बांध ? :-  पानी को लेकर भविष्य में पैदा होने वाले संकट की तस्वीर अब पहले से कहीं अधिक स्पष्ट होती जा रही है. वैज्ञानिकों की एक नई वैश्विक रिसर्च ने संकेत दिया है कि दुनिया भर के जलाशय तेजी से अपनी क्षमता खो रहे हैं. इसका कारण पानी की कमी नहीं, बल्कि उनमें लगातार जमा हो रही मिट्टी और गाद है. यह समस्या इतनी गंभीर होती जा रही है कि आने वाले दशकों में अरबों लोगों के सामने पीने के पानी, सिंचाई और खाद्य सुरक्षा का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है. शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो 2060 तक दुनिया के अनेक जलाशय अपने मूल उद्देश्य को पूरा करने में सक्षम नहीं रहेंगे।

Contents
पहली बार तैयार हुआ छोटे जलाशयों का वैश्विक डेटाबेसहर दशक में घट रही है जल संग्रहण क्षमतासूखे क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बढ़ा खतरा

पहली बार तैयार हुआ छोटे जलाशयों का वैश्विक डेटाबेस

इस महत्वपूर्ण अध्ययन का नेतृत्व चीनी वैज्ञानिकों ने किया है. शोध के दौरान विशेषज्ञों ने रिमोट सेंसिंग तकनीक, जियोस्पेशियल डेटा और इंजीनियरिंग रिकॉर्ड्स का उपयोग करके ‘ग्लोबल रिजर्वायर इन्वेंट्री’ (GREI) तैयार की. इस डेटाबेस में दुनिया भर के 5.5 लाख से अधिक जलाशयों को शामिल किया गया है. शोध की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इसमें छोटे जलाशयों को भी विस्तार से शामिल किया गया. इससे पहले किए गए कई अध्ययनों में इन जलाशयों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया था. आंकड़ों के अनुसार, अध्ययन में शामिल 95 प्रतिशत से अधिक जलाशय एक वर्ग किलोमीटर से भी छोटे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर जल आपूर्ति और कृषि के लिए इनकी भूमिका बेहद अहम है।

हर दशक में घट रही है जल संग्रहण क्षमता

रिसर्च में सामने आया है कि जलाशयों की पानी संग्रह करने की क्षमता औसतन हर दस साल में 7.3 प्रतिशत तक कम हो रही है. इसका मुख्य कारण सेडिमेंटेशन यानी मिट्टी और गाद का लगातार जमा होना है।

जब नदियों के साथ बहकर आने वाली मिट्टी बांधों और जलाशयों में जमा होने लगती है, तो धीरे-धीरे पानी के लिए उपलब्ध स्थान कम होने लगता है. समय के साथ यह स्थिति इतनी गंभीर हो सकती है कि जलाशय अपनी मूल क्षमता का बड़ा हिस्सा खो दें. वैज्ञानिकों का कहना है कि छोटे जलाशयों में यह प्रक्रिया बड़े बांधों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से हो रही है।

सूखे क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बढ़ा खतरा

अध्ययन के अनुसार, दुनिया के कई सूखा प्रभावित क्षेत्रों में यह समस्या बेहद गंभीर रूप ले चुकी है. अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से, मध्य पूर्व और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों में जलाशयों में गाद जमा होने की रफ्तार चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है.इन इलाकों में पहले से ही पानी की उपलब्धता सीमित है. ऐसे में जलाशयों की क्षमता कम होने से भविष्य में जल संकट और अधिक गहरा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में रहने वाली आबादी पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

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