गजब फार्मूला…. खाओ-नहाओ और अमर हो जाओ :- क्या होगा अगर आपको मौका मिले कि आप हमेशा जीवित रह सकें? सोचिए, मौत कभी आपके दरवाज़े तक न आए! यही ख्वाब अब सिलिकॉन वैली के कुछ अरबपति देख रहे हैं. वे अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं बना रहे, बल्कि अमरता खरीदने की कोशिश कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी यह सपना तेजी से बिक रहा है. हेल्थ इन्फ्लुएंसर्स मशरूम पाउडर, खास डाइट और दर्जनों सप्लीमेंट्स बेच रहे हैं. दावा है कि ये आपकी उम्र उलट देंगे या जीवन लंबा करेंगे।
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ऐसे सपने आज ने नहीं बल्कि आदिकाल से लोग देख रहे हैं. पहले इसके लिए लोग जप-तप करते थे और अब इसे तकनीक के जरिये साकार करने का सपना देखा जा रहा है. हालांकि इस बात पर सही-सही सहमति नहीं बन पाई है कि वाकई अमरता का कोई फॉर्मूला है या नहीं? अब तक तो दुनिया में कुछ लोग बायोहैकर होने का दावा कर रहे हैं और उनका कहना है कि वो अपनी उम्र को रिवर्स करना जानता है. तो क्या विज्ञान भी ये मानता है ?
क्या विज्ञान के पास है अमरता का फॉर्मूला?
वैज्ञानिक कहते हैं कि इन दावों में ज्यादातर कोई सबूत नहीं है. आजकल बर्फीले स्नान, सौना, क्रायोथेरेपी और रेड लाइट थेरेपी जैसे ट्रेंड तेजी से फैल रहे हैं. ये सब मिलकर एक नए उद्योग का चेहरा बन चुके हैं, जिसका आधार है—लोगों का बुढ़ापे और मौत से डरना. हालांकि सच ये है कि आज तक कोई इंसान अमर नहीं हुआ और न ही जैविक रूप से यह संभव है. वैज्ञानिक साफ कहते हैं कि प्रकृति का नियम है जीवन आगे बढ़ाना न कि मौत को हराना।
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विशेषज्ञों की राय है कि इंडस्ट्री में मुनाफे के लिए अमरता का फॉर्मूला बना दिया गया है. हालांकि इससे तीन बड़े खतरे हैं – वैज्ञानिक सबूतों की जगह मुनाफे पर ज़ोर, अनावश्यक जांच और उनके जोखिम और लंबी उम्र को रोकथाम की असली दवा की तरह पेश करना पूरे शरीर का एमआरआई स्कैन अब कैंसर जैसी बीमारियों को जल्दी पकड़ने के नाम पर बेचा जा रहा है लेकिन मेडिकल साइंस कहता है कि यह स्वस्थ लोगों को कोई फायदा नहीं देता।
इसे ओवरडायग्नोसिस कहा जाता है, यानि उन समस्याओं की पहचान हो जाना जो कभी आपके जीवन पर असर ही नहीं डालतीं. विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि उम्र बढ़ने को बीमारी की तरह बेचना गलत है. इससे न केवल डर और खर्च बढ़ता है, बल्कि एजिज्म यानी बुजुर्गों को बोझ मानने वाली सोच बढ़ती है।

