IsBananaSafeForKidneyPatients : क्या किडनी मरीजों को नहीं खाना चाहिए केला ? :- केला ऐसा फल है जिसे लोग अक्सर सेहत के लिए अच्छा मानकर बेझिझक खाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ लोगों के लिए केले को लेकर मामला थोड़ा अलग हो सकता है? FMRI गुरुग्राम की हेड क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. दीप्ति खटूजा के मुताबिक, किडनी की समस्या से जूझ रहे लोगों को केला खाते समय खास सावधानी रखनी पड़ सकती है.खासकर तब, जब शरीर में पोटैशियम का स्तर बढ़ा हुआ हो. समस्या केले में नहीं, बल्कि किडनी की बीमारी और शरीर में पोटैशियम का स्तर बढ़ने जैसी स्थिति में हो सकती है. इसलिए किडनी की बीमारी वाले हर मरीज के लिए एक जैसी डाइट तय नहीं की जा सकती।
केला एक ऐसा फल है जो हर घर मे बहुत आसानी से मिल जाता है. सस्ता, स्वादिस्ट और तुरंत एनर्जी देने वाला. जिम जाने वाले लोग हो या वजन बढाने की सोचने वाले, केला सबकी पहली पसंद होता है. पर जब बात आती है किडनी के मरीजो की, तो अक्सर ये सवाल उठता है कि क्या उनके लिए केला खाना सेफ है या ये उनकी सेहत बिगाड सकता है?
दरअसल, स्वस्थ लोगो के लिए केला एक सुपरफूड की तरह काम करता है. इसमे फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स भरपूर मात्रा मे होते है. लेकिन जिन लोगो की किडनी ठीक से काम नही कर रही है, उनके लिए यही फायदेमंद फल कभी-कभी खतरे की घंटी बन जाता है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि किडनी की सेहत और केले का क्या कनेक्शन है।
केले में कितना पोटैशियम होता है और यह क्यों जरूरी है ?
केले को पोटैशियम का सबसे बेहतरीन सोर्स माना जाता है. एक मीडियम साइज के केले मे लगभग 400 से 450 मिलीग्राम पोटैशियम होता है.
पोटैशियम हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी मिनरल है. ये हमारे दिल की धडकन को नार्मल रखने, मसल्स के काम करने और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने मे मदद करता है. एक आम इंसान जब पोटैशियम वाली चीजे खाता है, तो उसकी किडनिया खून मे से एक्स्ट्रा पोटैशियम को फिल्टर करके पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देती है. इससे शरीर मे बैलेंस बना रहता है।
हाई पोटैशियम होने पर क्या होता है?
जब किसी इंसान की किडनिया कमजोर या बीमार हो जाती है, तो वो खून से एक्स्ट्रा पोटैशियम को बाहर नही निकाल पाती. ऐसे मे खून मे पोटैशियम का लेवल जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है. मेडिकल भाषा मे इस स्थिति को हाइपरक्लेमिया (Hyperkalemia) कहते है. शरीर मे पोटैशियम का लेवल बहुत ज्यादा बढ़ना दिल के लिए काफी खतरनाक हो सकता है. इसके कुछ मुख्य लक्षण –
दिल की धड़कन का अचानक अनियंत्रित (तेज या बहुत धीमी) हो जाना।
हाथ-पैरो मे झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होना.
मासपेशियो मे कमजोरी और चलने-फिरने मे भारीपन लगना.
सीने मे हल्का दर्द, बेचैनी और सांस फूलना.
बहुत ज्यादा उल्टी या चक्कर आने जैसी समस्या होना।

