GoddessParvatiLionStory : मां पार्वती को खाने आया शेर कैसे बना सवारी ? :- मां दुर्गा का स्वरूप सामने आते ही उनकी सवारी के रूप में सिंह की छवि मन में आती है. धार्मिक मान्यताओं में सिंह को शक्ति, साहस और पराक्रम का प्रतीक माना गया है. लेकिन देवी के वाहन के रूप में सिंह के जुड़ने की एक रोचक पौराणिक कथा भी प्रचलित है. इस कथा में एक सिंह मां पार्वती को अपना भोजन बनाने के इरादे से उनके पास पहुंचता है. लेकिन आखिर क्या होत है कि बाद में वही सिंह मां पार्वती का वाहन बन जाता है और आगे चलकर देवी के स्वरूप से उसका गहरा संबंध स्थापित हो जाता है।
श्रीमद् देवीभागवत पुराण की कथा के अनुसार, एक समय मां पार्वती कठोर तपस्या कर रही थीं. माता का उद्देश्य भगवान शिव को पति के रूप में पाना था. तपस्या के दौरान उन्होंने अपना पूरा ध्यान भगवान शिव की आराधना में लगा दिया था.कहा जाता है कि माता की तपस्या इतनी कठिन थी कि उन्हें लंबे समय तक जंगल में रहकर साधना करनी पड़ी. वह स्थान घना वन था और वहां अनेक जंगली जानवर भी रहते थे. इसी दौरान एक सिंह की नजर तपस्या में लीन मां पार्वती पर पड़ी।
कथा के अनुसार, सिंह ने जब माता पार्वती को देखा तो उन्हें अपना शिकार समझ लिया. वह उन्हें खाने के उद्देश्य से उनके पास पहुंचा. लेकिन माता पार्वती अपने ध्यान और तपस्या में पूरी तरह लीन थीं. सिंह उनके पास पहुंचकर भी माता पर हमला नहीं कर पाया. वह कुछ समय तक वहीं खड़ा रहा. धीरे-धीरे उसकी प्रवृत्ति बदलने लगी और वह माता की तपस्या को देखने लगा. कहा जाता है कि सिंह वहां माता के पास बैठ गया और उनकी तपस्या पूरी होने तक वहीं रहा।
माता की तपस्या से बदल गया सिंह
मां पार्वती की तपस्या और दिव्य शक्ति का सिंह पर गहरा प्रभाव पड़ा. जिस सिंह के मन में पहले माता को अपना भोजन बनाने की इच्छा थी, उसके भीतर धीरे-धीरे भक्ति और श्रद्धा का भाव आ गया. कथा के अनुसार, सिंह लंबे समय तक माता के पास रहा. वह उनकी तपस्या का साक्षी भी बना.मान्यता है कि उसके बाद मां पार्वती ने सिंह को अपने वाहन के रूप में स्वीकार कर लिया. इसके बाद वही सिंह देवी के शक्ति स्वरूप का प्रतीक बन गया. जब मां पार्वती ने देवी दुर्गा का रूप धारण किया, तब सिंह उनके साथ उनके वाहन के रूप में जुड़ा रहा. इसी कारण मां दुर्गा की तस्वीरों और प्रतिमाओं में उन्हें सिंह पर सवार दिखाया जाता है. यह कथा इस बात का भी प्रतीक मानी जाती है कि देवी की शक्ति के सामने हिंसक प्रवृत्ति भी भक्ति और समर्पण में बदल सकती है।
देवी के वाहन के रूप में सिंह का महत्व
हिंदू धार्मिक परंपरा में सिंह को शक्ति और निर्भीकता का प्रतीक माना गया है. वह जंगल का शक्तिशाली जीव है और उसके भीतर साहस तथा पराक्रम की भावना देखी जाती है. मां दुर्गा के साथ सिंह का होना इसी शक्ति का प्रतीक माना जाता है. देवी को अधर्म और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली शक्ति के रूप में पूजा जाता है, जबकि सिंह उनके साहस और वीरता का प्रतिनिधित्व करता है. इसलिए देवी दुर्गा के स्वरूप में मां और उनके वाहन दोनों का अपना अलग धार्मिक महत्व है।

