EducationMinistry : कौन हैं प्रह्लाद जोशी? जिन पर PM मोदी ने जताया भरोसा :- “देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव… NEET विवाद के बाद केंद्र सरकार का बड़ा फैसला… और अब शिक्षा मंत्रालय की कमान ऐसे नेता को, जिनका राजनीतिक अनुभव तीन दशक से भी ज्यादा पुराना है। आखिर कौन हैं प्रह्लाद जोशी, जिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया भरोसा? देशभर में NEET परीक्षा पेपर लीक और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है।
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प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने संगठन से लेकर केंद्र सरकार तक कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। उनका जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा में हुआ। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहे और बाद में कर्नाटक यूनिवर्सिटी से संबद्ध केएस आर्ट्स कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
उनकी राजनीतिक यात्रा संगठन से शुरू हुई। वर्ष 1995 से 1998 तक वे धारवाड़ भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे। इसके बाद जिला महासचिव के रूप में संगठन को मजबूत किया। वर्ष 2004 में उन्होंने पहली बार धारवाड़ लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद में कदम रखा। इसके बाद 2009, 2014, 2019 और 2024 में लगातार जीत दर्ज करते हुए वे पांच बार लोकसभा सांसद बने।
संगठन में उनकी कार्यशैली और संसदीय अनुभव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में उन्हें पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया। उन्होंने संसदीय कार्य, कोयला और खान जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई।अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद देशभर की निगाहें प्रह्लाद जोशी पर टिकी हैं। ऐसे समय में जब शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, छात्रों और अभिभावकों की उम्मीदें नए नेतृत्व से जुड़ गई हैं। माना जा रहा है कि उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता का लाभ शिक्षा मंत्रालय को भी मिल सकता है।
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हालांकि, शिक्षा मंत्रालय की सबसे बड़ी चुनौती होगी—NEET परीक्षा को लेकर छात्रों का भरोसा दोबारा कायम करना, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाना।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रह्लाद जोशी इस चुनौती का सामना किस तरह करते हैं।”सवाल सिर्फ मंत्री बदलने का नहीं… सवाल देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य का है। क्या नया नेतृत्व शिक्षा व्यवस्था में भरोसा लौटा पाएगा? इस बड़ी खबर पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट करके जरूर बताइए।

