AIGovernment : दुनिया की पहली ‘AI सरकार’, कैबिनेट में गांधी और मंडेला के डिजिटल अवतार :- जरा सोचिए, एक ऐसा देश जहां कोई राजनेता न हो और देश को चलाने वाले सभी फैसले इंसान नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ले. सुनने में यह किसी हॉलीवुड फिल्म की कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन फिलीपींस के एक छोटे से द्वीप पर इसे सच साबित करने की तैयारी पूरी हो चुकी है. यहां एक ऐसी अनोखी ‘AI सरकार’ बनाई गई है, जिसकी कैबिनेट में महात्मा गांधी, नेल्सन मंडेला और विंस्टन चर्चिल जैसी महान शख्सियतों के ‘डिजिटल अवतार’ (AI बॉट्स) बैठेंगे. ये डिजिटल नेता आपस में बहस करेंगे, प्रस्तावों पर वोटिंग करेंगे और कानून बनाएंगे।
ब्रिटेन के टेक बिजनेसमैन का अनोखा ‘माइक्रोनेशन’
इस हैरतअंगेज प्रयोग को ब्रिटेन के मशहूर टेक उद्यमी डैन थॉमसन हकीकत में बदल रहे हैं. उन्होंने फिलीपींस के पलावन द्वीपसमूह में स्थित 3.6 वर्ग किलोमीटर के एक छोटे से द्वीप को अपनी AI कंपनी के नाम पर ‘सेंसाय’ (Sensay) नामक एक ‘माइक्रोनेशन’ घोषित किया है. माइक्रोनेशन ऐसे छोटे स्वघोषित देश होते हैं, जो खुद को आजाद तो मानते हैं लेकिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी देश या संयुक्त राष्ट्र से मान्यता नहीं मिलती है. थॉमसन ने इस देश को चलाने के लिए 17 AI बॉट्स की एक विशेष परिषद (कैबिनेट) तैयार की है. इन AI बॉट्स को दुनिया के महान नेताओं के विचारों, किताबों और उनके जीवन दर्शन के आधार पर प्रोग्राम किया गया है।
बिना किसी लालच और भ्रष्टाचार के होंगे फैसले
डैन थॉमसन का दावा है कि यह AI सरकार आज की पारंपरिक राजनीति से कहीं ज्यादा बेहतर साबित होगी. ये AI नेता किसी व्यक्तिगत लालच, राजनीतिक स्वार्थ, जाति-धर्म या किसी लॉबिंग के दबाव में काम नहीं करेंगे. इस डिजिटल देश के नागरिक ऑनलाइन माध्यम से सरकार के सामने अपनी समस्याएं या प्रस्ताव रखेंगे. इसके बाद AI कैबिनेट उन प्रस्तावों के नफे-नुकसान पर चर्चा करेगी और वोटिंग के जरिए पूरी तरह निष्पक्ष फैसला लेगी।
‘AI’ देशों पर कर देगा हमला? रोकने के लिए बना इंसानी सुरक्षा कवच
इस प्रयोग को लेकर जहां तकनीक के दीवाने उत्साहित हैं, वहीं इसके खतरों को लेकर भी बड़ी चिंताएं जताई जा रही हैं. खुद थॉमसन भी मानते हैं कि अगर AI सिस्टम गलत दिशा में चला गया तो नतीजे खतरनाक हो सकते हैं. उन्होंने मजाकिया और गंभीर लहजे में कहा कि अगर AI खुद हथियार जुटाकर पड़ोसी द्वीपों पर हमला करने की योजना बनाने लगे, तो स्थिति बेहद खराब हो जाएगी. हालांकि ऐसा होना नामुमकिन है, फिर भी सुरक्षा के लिहाज से उन्होंने एक ‘ह्यूमन ओवरराइड असेंबली’ (इंसानों की समिति) बनाई है. यह समिति किसी भी आपातकाल या खतरे की स्थिति में AI के फैसले को तुरंत रद्द (ओवरराइड) कर सकती है।
12 हजार लोग ई-नागरिक बनने को तैयार, आलोचकों ने कहा- आइडिया बेतुका
इस अनोखे देश में रहने के लिए ‘रेजिडेंसी प्रोग्राम’ साल 2027 में शुरू होने वाला है, लेकिन अभी से ही दुनिया भर के 12,000 से ज्यादा लोगों ने इस AI देश का ‘ई-नागरिक’ बनने के लिए आवेदन कर दिया है. थॉमसन के मुताबिक, आज की मौजूदा सरकारों से लोगों का भरोसा उठ रहा है और भ्रष्टाचार से तंग आकर लोग इस नई व्यवस्था की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।
AI द्वीप की मुख्य बातें —–
वर्तमान स्थिति & भविष्य के आंकड़े.
द्वीप का कुल क्षेत्रफल 3.6 वर्ग किलोमीटर (पलावन, फिलीपींस).
कैबिनेट में AI डिजिटल अवतार 17 (गांधी, मंडेला, चर्चिल, सन त्जू आदि).
दिलचस्पी दिखाने वाले ई-नागरिक 12,000 से अधिक लोग.
भविष्य का बुनियादी ढांचा 30 आलीशान विला बनाने की योजना.
रेजिडेंसी प्रोग्राम की शुरुआत वर्ष 2027 से आधिकारिक लॉन्चिंग.
दूसरी तरफ, ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की AI विशेषज्ञ अलोंद्रा नेल्सन जैसी बड़ी आलोचकों ने इसे बेहद अलोकतांत्रिक और खतरनाक बताया है. उनका कहना है कि AI आए दिन चैटबॉट्स में गड़बड़ियां (हलुसिनेशन) कर रहा है, ऐसे में उससे सरकार चलवाने की उम्मीद करना पूरी तरह बेतुका है. इसके बावजूद, थॉमसन को पूरा भरोसा है कि आने वाले समय में दुनिया के बड़े देश भी इसी तरह के AI सिस्टम को अपनाएंगे।

