BadrinathMystery : बद्रीनाथ धाम में नहीं भौंकते कुत्ते, सांप होते हैं जहर मुक्त :- चारधाम यात्रा की शुरुआत के साथ ही चारों धाम के कपाट खुल गये हैं. चारों धामों में आज सबसे आखिरी में बद्रीनाथ के कपाट खुल गये. अब भक्त 6 महीने तक भगवान विष्णु बद्रीनाथ के दर्शन कर सकेंगे. भगवान की कृपा और यहां की प्रकृति व शांति का आनंद भी ले सकेंगे, लेकिन क्या आपको पता है कि बद्रीनाथ धाम में आज भी कई ऐसे रहस्य है, जिन्हें बेहद कम लोग ही जानते हैं, इतना ही नहीं इनसे आज तक पर्दा नहीं उठ पाया है. इनमें मंदिर की अखंड ज्योतिष से लेकर कुत्तों का न भौंकना और वन्य जीव जैसे सांप और बिच्छु का जहरीला न होना है. आइए जानते हैं ऐसा क्यों है. इसके पीछे का रहस्य…
मंदिर बंद होने के बाद भी जलती रहती है अखंड ज्योति
शीतकाल की शुरुआत से पहले ही बद्रीनाथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. मंदिर के अंदर घी का एक बड़ा दीपक जलाया जाता है, जो छह महीने तक मंदिर बंद रहने के बाद खुलने पर यह ज्योति जली मिलती है. यह ज्योति सालों साल जलती है. पुजारियों और लोगों की मान्यता है कि मंदिर बंद होने के बाद 6 महीने यहां देवता खुद इस अखंड ज्योतिष की रक्षा करते हैं, जिसके चलते यह यह कभी बुझती नहीं है. यही वजह है कि मंदिर खुलते ही श्रद्धालु सबसे पहले मंदिर में अखंड ज्योति के दर्शन करते हैं।
यहां के सांप बिच्छुओं में नहीं होता जहर
मान्यता है कि बद्रीनाथ धाम में वन्य जीव जैसे सांप और बिच्छु में जहर नहीं होता. ये कभी किसी का कांटते नहीं है. वहीं मंदिर के आसपास या इसकी सीमा में आने वाले कुत्ते भौंकते नहीं है. इसके पीछे की वजह इस कथा को माना जाता है. बताया जाता है कि बद्रीनाथ में भगवान विष्णु ने नर-नारायण के रूप में अवतार लिया था।
वे यहां ध्यान मुद्रा में लीन हैं. उनके ध्यान में विघ्न न आए इसलिए यहां का माहौल बहुत ही शांत और अलौकिक है. यहां के कुत्तों से लेकर वन्य जीवन सांप और बिच्छुओं को भगवान द्वारा जहर न होने का आशीर्वाद प्राप्त है. कुत्ते भी भौंकते नहीं है. हालांकि इस बात की कोई वैज्ञानिक पुष्टी नहीं है, लेकिन यहां की शांति और प्रकृति के बीच वन्य जीवों द्वारा किसी को काटने के मामले भी सामने नहीं आये हैं।

