NepalFloodDisaster ; नेपाल जलप्रलय में अब तक 165 शव बरामद :- प्रकृति का रौद्र रूप जब भी सामने आता है, अपने पीछे सिर्फ बर्बादी और खौफनाक सन्नाटा छोड़ जाता है. नेपाल के उत्तरी रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आए भयंकर सैलाब और लैंडस्लाइड ने एक बार फिर कुदरत के उसी खौफनाक रूप का अहसास कराया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक यूजर द्वारा शेयर किया गया दिल दहला देने वाला वीडियो इस वक्त तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें दिख रहा है कि तबाही से ठीक पहले की खामोशी को चीरता हुआ पानी का यह उफान पूरे इलाके को अपनी आगोश में लेने के लिए बेताब दिखा।
नेपाल आर्मी ने अभी तक 116 लोगों को बचाया है, जिसमें 21 भारतीय शामिल हैं. सेना की तरफ से अभी भी रेस्क्यू और सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है.नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अभिनारायण काफले ने कहा, ‘बाढ़ की वजह से अभी भी 32 पुलिसवाले लापता हैं. ड्रोन से खोज की जा रही है. बचाव के लिए 3318 पुलिसवालों को लगाया गया है. 18 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं. बाढ़ के बाद से 579 टूरिस्ट लापता हैं. लापता टूरिस्ट में से 113 नेपाली और 466 विदेशी हैं. लापता टूरिस्ट की कुल संख्या 826 है।
नेपाल बाढ़ की वजह से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं. अभी तक 165 लोगों की जान जा चुकी है. नेपाल आर्मी लगातार सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है. अहम बात यह है कि अभी तक 116 लोगों को बचाया भी जा चुका है, जिसमें 21 भारतीय भी शामिल हैं. नेपाल बाढ़ से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर देखने को मिले हैं, जो कि काफी भयावह हैं ।
नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अभिनारायण काफले ने कहा, ‘बाढ़ की वजह से अभी भी 32 पुलिसवाले लापता हैं. ड्रोन से खोज की जा रही है. बचाव के लिए 3318 पुलिसवालों को लगाया गया है. 18 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं. बाढ़ के बाद से 579 टूरिस्ट लापता हैं. लापता टूरिस्ट में से 113 नेपाली और 466 विदेशी हैं. लापता टूरिस्ट की कुल संख्या 826 है।
हिमालयी इलाकों की बेहद नाजुक भू-बनावट और तेजी से बदलता मौसम ऐसी तबाही की मुख्य वजह बन रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक तिब्बत के ऊपरी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश, पहाड़ों में लैंडस्लाइड से नदी का प्रवाह बाधित होने और संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट के कारण यह जल-प्रलय आई है।
संकरे पहाड़ी रास्तों से गुजरते समय मलबे से भरे इस सैलाब की विनाशकारी क्षमता कई गुना बढ़ गई. नेपाल का यह मंजर पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए एक बड़ा अलर्ट है, जहां जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए मजबूत अर्ली वार्निंग सिस्टम और रियल-टाइम डेटा शेयरिंग की सख्त जरूरत है।

