PIBFactCheck : ‘कागज के नोट’ का क्या है वायरल दावा ? :- आज के डिजिटल युग में जितनी तेजी से सही जानकारी हम तक पहुंचती है, उससे कहीं अधिक गति से झूठी और भ्रामक खबरें इंटरनेट पर फैल जाती हैं। पिछले कुछ हफ्तों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स—खासकर व्हाट्सएप फेसबुक और एक्स पर एक मैसेज धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है। इस मैसेज ने देश के करोड़ों लोगों की नींद उड़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि आने वाली 30 जून से भारत में एक बहुत बड़ा आर्थिक बदलाव होने जा रहा है, जिसके तहत बाजार में मौजूद सभी ‘कागज के नोट’ को चलन से बाहर कर दिया जाएगा।
इस अफवाह ने आम आदमी से लेकर छोटे-बड़े व्यापारियों, गृहिणियों और नौकरीपेशा लोगों के बीच एक भारी घबराहट का माहौल पैदा कर दिया है। हर कोई यह जानने को बेताब है कि क्या वाकई उनकी गाढ़ी कमाई के पैसे रद्दी के कागज में तब्दील होने वाले हैं? आइए, इस पूरी खबर का पोस्टमार्टम करते हैं और जानते हैं कि भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने इस पर क्या कहा है। इंटरनेट पर तैर रहे इस भ्रामक मैसेज में बेहद डरावने तरीके से कुछ खास बातें कही गई हैं, जो इस प्रकार हैं:
30 जून की डेडलाइन: मैसेज में स्पष्ट रूप से 30 जून का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इसके बाद देश में कागज के नोट कानूनी रूप से मान्य नहीं होंगे।
प्लास्टिक करेंसी का आगमन: दावा किया जा रहा है कि सरकार और RBI कागज के नोटों को पूरी तरह से बंद करके बाजार में ‘प्लास्टिक के नोट’ उतारने की तैयारी कर चुके हैं।
नोटों को बदलने की चेतावनी: लोगों को डराया जा रहा है कि वे जल्द से जल्द अपने पास रखे सभी कागजी नोटों को बैंक में जमा कर दें, अन्यथा उनका सारा पैसा डूब जाएगा।
PIB फैक्ट चेक: सामने आई 100% असली हकीकत
देश भर में फैल रही इस सनसनीखेज अफवाह और जनता के बीच बढ़ती बेचैनी को देखते हुए, भारत सरकार की आधिकारिक सूचना एजेंसी प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) को तुरंत मैदान में उतरना पड़ा। सरकार के फैक्ट-चेकिंग विंग, जिसे ‘PIB Fact Check’ के नाम से जाना जाता है, ने इस पूरी खबर की गहन पड़ताल की।”सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह दावा शत-प्रतिशत फर्जी और भ्रामक है। भारत सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 30 जून से कागजी नोटों को बंद करने का कोई भी फैसला नहीं लिया गया है। यह केवल एक कोरी अफवाह है जिसका उद्देश्य जनता के बीच डर और भ्रम फैलाना है।”
क्या कहता है भारतीय रिजर्व बैंक ?
भारतीय अर्थव्यवस्था में मुद्रा से जुड़े सभी बड़े फैसले केवल और केवल भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लिए जाते हैं। जब भी करेंसी में कोई बदलाव होता है, नए नोट जारी किए जाते हैं या पुराने नोट वापस लिए जाते हैं, तो RBI एक विस्तृत सर्कुलर जारी करता है।RBI ने इस मामले में स्पष्ट किया है कि कोई सर्कुलर जारी नहीं हुआ , केंद्रीय बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर ऐसा कोई भी नोटिफिकेशन या प्रेस रिलीज मौजूद नहीं है जो कागज के नोटों को बंद करने की बात कहता हो। आपके पास मौजूद ₹10, ₹20, ₹50, ₹100, ₹200 और ₹500 के सभी कागजी नोट पूरी तरह से वैध हैं। ये सभी नोट कानूनी निविदा हैं और देश के किसी भी हिस्से में लेन-देन के लिए पूरी तरह से मान्य हैं। कोई भी दुकानदार, बैंक या संस्था इन्हें लेने से मना नहीं कर सकती।
सरकार की सख्त चेतावनी और सुझाव
वित्तीय मामलों से जुड़ी ऐसी झूठी खबरें अर्थव्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं। इससे बाजार में पैनिक बाइंग नकदी की जमाखोरी और बैंकों में बेवजह की भीड़ बढ़ने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं , आधिकारिक पुष्टि के बिना फॉरवर्ड न करें: व्हाट्सएप या फेसबुक पर आने वाले किसी भी ऐसे मैसेज को अपने रिश्तेदारों या दोस्तों को फॉरवर्ड न करें, जब तक कि आप उसकी सच्चाई न जान लें। हमेशा आधिकारिक वेबसाइट चेक करें: करेंसी से जुड़ी किसी भी खबर की पुष्टि के लिए हमेशा RBI की आधिकारिक वेबसाइट (www.rbi.org.in) पर जाएं।

