NandaDeviRajJaat : देवताओं की यात्रा या व्यवस्थाओं की मज़बूरी :- राजजात को लेकर एक और बड़ा सवाल यह है कि — “यात्रा की तिथि स्वयं देवी-देवताओं द्वारा तय होती है” तो फिर ठंड और बर्फबारी का तर्क कैसे सामने आ गया? एक तरफ कहा जाता है कि — राजजात यात्रा की तिथि स्वयं देवता तय करते हैं, मनौती और परंपरा के अनुसार और दूसरी तरफ — ठंड और बर्फबारी का हवाला देकर यात्रा टाल दी जाती है।
क्या आस्था अब प्रशासनिक फैसलों के अधीन हो गई है? आस्था और परंपरा में पली-बढ़ी इस यात्रा को अब प्रशासनिक और व्यवस्थागत फैसलों से जोड़ा जा रहा है, जिससे कई श्रद्धालु असहज महसूस कर रहे हैं।
बड़ी अपडेट एक क्लिक में :- ManipurVictimDeath : इंसाफ के इंतज़ार में टूटी एक ज़िंदगी
5000 करोड़ का बजट और गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप वित्तीय पारदर्शिता को लेकर हैं। सूत्रों के अनुसार, मंदिर समिति ने इस वर्ष सरकार से करीब 5000 करोड़ रुपये का बजट मांगा है।
लेकिन आरोप यह भी है कि “इसी बजट से खरीदे गए टेंट, छाते और राशन सामग्री बाजार में बेची जा रही है।”
हालाँकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सवाल यह जरूर उठता है कि अगर तैयारियाँ अधूरी हैं, तो इतना बड़ा बजट कहाँ और कैसे खर्च हुआ?
प्रशासन क्या कहता है?
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार का कहना है कि — “जिला प्रशासन का काम यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना है। आपदा की संभावनाओं को देखते हुए समिति को तिथि पर पुनर्विचार के लिए पत्र लिखा गया था।”
यानी प्रशासन भी जोखिम को नजरअंदाज करने के पक्ष में नहीं था।
23 जनवरी को होगा अंतिम ऐलान
हालाँकि यात्रा को स्थगित करने पर सहमति बन चुकी है, लेकिन अंतिम और औपचारिक घोषणा 23 जनवरी को नौटी गांव में मनौती कार्यक्रम के दौरान की जाएगी। समिति का कहना है कि
यह पहली बार है जब यात्रा को लेकर शुभ मुहूर्त के अनुसार विधिवत संकल्प लिया गया है।
नंदा देवी राजजात सिर्फ एक यात्रा नहीं, यह उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा है। लेकिन आज सवाल यह है —क्या आस्था से बड़ा इंतज़ाम है? क्या परंपरा से बड़ी व्यवस्था? और क्या पारदर्शिता के बिना इतना बड़ा निर्णय सही है? जवाब शायद 23 जनवरी को मिलेगा ।

