ChinaWorkplaceCruelty : Boss ने दी 200 उठक-बैठक की सजा! :- चीन के हांगझोउ शहर से सामने आया यह मामला इन दिनों वर्कप्लेस के दबाव और कर्मचारियों पर बनाए जाने वाले अजीबोगरीब नियमों को लेकर चर्चा में है. यहां एक लड़की ने कंपनी का सेल्स टारगेट पूरा नहीं किया तो कथित तौर पर उसके मैनेजर ने उसे शारीरिक सजा दी. महिला को कहा गया कि वह या तो जुर्माना दे या फिर स्क्वाट करे।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, महिला की पहचान उसके सरनेम यांग के तौर पर हुई है. वह अपनी पहली नौकरी के लिए झेजियांग प्रांत के हांगझोउ आई थी. जून में उसने एक लोन असिस्टेंस कंपनी में फाइनेंशियल कंसल्टेंट के तौर पर काम शुरू किया था. हालांकि, उसकी रोजमर्रा की जिम्मेदारी मुख्य रूप से टेली-सेल्स से जुड़ी थी. कंपनी में काम शुरू किए अभी ज्यादा समय भी नहीं हुआ था कि उस पर रोज के टारगेट पूरे करने का दबाव बनने लगा. मैनेजर झांग ने कर्मचारियों के लिए रोज 200 फोन कॉल करने, कम से कम एक संभावित ग्राहक को कंपनी के साथ जोड़ने और कम से कम एक ऐसे ग्राहक को तैयार करने का टारगेट रखा था, जो कंपनी के साथ काम करने में दिलचस्पी दिखाए।
टारगेट पूरा नहीं हुआ तो सामने आया अजीब नियम
28 जुलाई को यांग तय टारगेट पूरा नहीं कर पाईं. इसके बाद कथित तौर पर मैनेजर ने उनके सामने दो ऑप्शन रखे. एक तो हर अधूरे टास्क के लिए 50 युआन यानी करीब 709 रुपये का जुर्माना देना और दूसरा हर मिस हुए टारगेट के बदले 100 स्क्वाट करना. यांग के मुताबिक, उनके पास जुर्माना देने के लिए पैसे नहीं थे. इसलिए उन्होंने शारीरिक सजा वाला ऑप्शन चुना. दो टारगेट पूरे नहीं होने के कारण उन्हें कुल 200 स्क्वाट करने पड़े. उन्होंने अलग-अलग जगहों पर स्क्वाट करते हुए वीडियो भी रिकॉर्ड किए और इन्हें अपने सुपरवाइजर को सबूत के तौर पर भेजा।
200 स्क्वाट के बाद चलना हुआ मुश्किल
शुरुआत में यांग ने किसी तरह एक्सरसाइज पूरी कर ली, लेकिन आखिरी सेट खत्म होते-होते उनकी हालत बिगड़ने लगी. बताया गया कि वह ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थीं. चलते समय उनके पैर लड़खड़ा रहे थे और दोनों पैरों में तेज दर्द होने लगा. इसके बावजूद उन्होंने तुरंत डॉक्टर से संपर्क नहीं किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक परेशानी भी इसकी एक वजह थी. लेकिन अगले कुछ दिनों में उनकी हालत को लेकर चिंता बढ़ गई. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट में बताया गया है कि घटना के करीब पांच दिन बाद उन्हें अपने पेशाब का रंग सामान्य से काफी गहरा दिखाई दिया. यही वह समय था, जब उन्होंने अस्पताल जाने का फैसला किया. जांच के बाद डॉक्टरों ने जो बीमारी बताई, उसने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।

