पेंशन धांधली मामले का हुआ खुलासा
उत्तराखंड में पेंशन की धांधली के मामले में एक बड़ी संकट का सामना, जानकारी के अनुसार, समाज कल्याण विभाग को यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने जिन्हें पेंशन दे रहा है, वे जीवित हैं या मृत्यु हो चुके हैं।
इसका मतलब है कि हर साल बड़ी मात्रा में पेंशन के लिए योग्य लोगों को भी इसका हिस्सा बनाया जा सकता है, जिससे कैग की रिपोर्ट में फर्जीवाड़े की आशंका बढ़ सकती है।
समाज कल्याण विभाग द्वारा पेंशन में धांधली रोकने के लिए दो महीने करोड़ों रुपये के स्वाधीन प्रमाण पत्र लिए जाते हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में यह बात समझ में नहीं आती कि वर्तमान में जीवित पेंशनधारक की जानकारी कैसे प्राप्त की जाती है।
क्या समाज कल्याण विभाग ने किसी भी पेंशनधारक से इसका प्रमाण नहीं लिया, जबकि विभाग चार श्रेणियों (वृद्धावस्था, विधवा, किसान और दिव्यांग) में हर माह करोड़ों रुपये के रूप में पेंशन जारी कर रहा है।
इस समस्या का एक अन्य पहलू यह है कि पेंशनधारकों की मृत्यु की सूचना के लिए नगर निकायों और ग्राम पंचायतों की ओर से निर्भर है।
जब किसी पेंशनधारक की मृत्यु होती है, तो यह इन स्थानीय निकायों की ओर से खुली बैठक में दी जाती है और उसकी पेंशन बंद कर दी जाती है।
मृतक के स्वजन की सूचना पर भी पेंशन बंद करने का प्रावधान है, लेकिन इसमें भी संशय है कि क्या नगर निकायों और ग्राम पंचायतों तक हर पेंशनधारक की मृत्यु की सूचना पहुंचती होगी और कितने पेंशनधारक अपने कर्तव्य को ईमानदारी से निभाते हैं, इस बारे में भी कोई निश्चित जानकारी नहीं है।
प्रदेश में पिछले कुछ सालों में हुए छात्रवृत्ति घोटाले का भी सवाल उठता है, जिसमें लाखों करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ था, लेकिन इससे भी कोई सबक नहीं लिया गया है।
इस मामले में सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि पेंशन योजना के तहत सही लोगों को सही रूप में लाभ मिल सके और ऐसे घोटालों को रोका जा सके जो सामाजिक सुरक्षा के इस महत्वपूर्ण हिस्से को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

