अब पढ़ाई जाएगी देश के असली हीरो की कहानियां :- देश के बच्चों को अब किताबों के पन्नों में सिर्फ युद्ध नहीं, वीरता, बलिदान और देशभक्ति की असली कहानियां पढ़ने को मिलेंगी. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने अपने पाठ्यक्रम में एक बड़ा बदलाव करते हुए सेना के उन जांबाज़ सपूतों की गाथाएं शामिल की हैं, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर भारत मां की रक्षा की।
तीन महान सैन्य योद्धाओं फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ, परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा और महावीर चक्र से सम्मानित ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान की कहानियां अब कक्षा 7 और 8 के विद्यार्थियों को पढ़ाई जाएंगी. यह पहल न केवल छात्रों को साहस, कर्तव्य और राष्ट्रप्रेम की भावना से जोड़ने का प्रयास है, बल्कि एक ऐसा कदम है जिससे भविष्य की पीढ़ी को अपने असली नायकों से पहचान होगी।
यह ख़बर भी पढ़ें :- तुलसी के पत्तों का पानी पीने के फायदे
सिलेबस में शामिल हुईं बलिदान की कहानियां
NCERT ने इस साल जो बदलाव किए हैं, उनमें खासतौर पर उर्दू और अंग्रेज़ी माध्यम की कक्षाओं में नायकों की जीवनी जोड़ी गई है।
कक्षा 7 (उर्दू): महावीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान.
कक्षा 8 (उर्दू): भारत के पहले फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ.
कक्षा 8 (अंग्रेज़ी): परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर सोमनाथ शर्मा.
इन अध्यायों के ज़रिए छात्रों को यह बताया जाएगा कि असली हीरो वे नहीं जो पर्दे पर होते हैं, बल्कि वे होते हैं जो सरहद पर चुपचाप देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देते हैं।
फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ: नेतृत्व की मिसाल
भारत के पहले फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ का नाम भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा में अमर है. 1971 के भारत-पाक युद्ध में उनकी भूमिका निर्णायक रही थी. उनके कुशल नेतृत्व ने न केवल युद्ध में जीत दिलाई, बल्कि एक नया देश बांग्लादेश भी अस्तित्व में आया।
उनका जीवन सिर्फ एक सैन्य अधिकारी का नहीं, बल्कि कर्तव्य, ईमानदारी और नेतृत्व की प्रेरणा है, जिसे अब देश के बच्चे किताबों में पढ़कर समझ सकेंगे।
यह ख़बर भी पढ़ें :- सरसों का तेल और लहसुन के फायदे
ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान: धर्म से ऊपर था देश
ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान, भारतीय सेना के वह योद्धा थे जिन्होंने 1947-48 में पाकिस्तानी कबायलियों और सेना के खिलाफ लड़ा और वीरगति को प्राप्त हुए. उस्मान साहब को यह अवसर मिला था कि वे पाकिस्तान की सेना में शामिल हो सकते थे, लेकिन उन्होंने भारत को चुना।
उनकी देशभक्ति, निष्ठा और बलिदान का सम्मान करते हुए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया. वे उन नायकों में से हैं जिन्होंने यह साबित किया कि देश से बड़ा कोई धर्म, जाति या विचारधारा नहीं होती।
मेजर सोमनाथ शर्मा: परमवीर चक्र के पहले विजेता
मेजर सोमनाथ शर्मा भारतीय सेना के पहले सैनिक थे जिन्हें परमवीर चक्र से नवाज़ा गया. 1947 के कश्मीर युद्ध में उन्होंने अद्भुत साहस का परिचय देते हुए अपने आखिरी सांस तक दुश्मनों से लड़ाई की।
उनकी आखिरी रेडियो कॉल आज भी सेना में गर्व के साथ दोहराई जाती है, “The enemy are only 50 yards from us. We are heavily outnumbered. We are under devastating fire. I shall not withdraw an inch but will fight to the last man and the last round.”
उनकी यह गाथा अब बच्चों को साहस, जिम्मेदारी और मातृभूमि के लिए समर्पण की सीख देगी।
नेशनल वॉर मेमोरियल: बलिदान देने वालों को श्रद्धांजलि
2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र को समर्पित नेशनल वॉर मेमोरियल न केवल एक इमारत है, बल्कि यह हर उस सैनिक की कहानी को जीवित रखने का स्थान है, जिसने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
इंडिया गेट के पास ‘सी’ हेक्सागन पर बना यह स्मारक भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के शहीदों की याद में निर्मित किया गया है. इसकी दीवारों पर आज़ादी के बाद से लेकर आज तक शहीद हुए हजारों सैनिकों के नाम दर्ज हैं. यह स्मारक युवाओं को राष्ट्रसेवा, बलिदान और आत्मगौरव का संदेश देता है।
परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर अंडमान के द्वीप
देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र विजेताओं को सम्मानित करने के उद्देश्य से, प्रधानमंत्री मोदी ने 2023 में पराक्रम दिवस पर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के 21 द्वीपों का नाम इन वीरों के नाम पर रख दिया. यह फैसला न केवल एक ऐतिहासिक कदम था, बल्कि देश के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक जीवंत उदाहरण भी।
अब इन द्वीपों के नाम हैं:
मेजर सोमनाथ शर्मा द्वीप.
कैप्टन विक्रम बत्रा द्वीप.
लेफ्टिनेंट मनोज पांडे द्वीप.
ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव द्वीप.
सूबेदार संजय कुमार द्वीप.
और बाकी सभी 21 वीरों के नामों पर विशेष रूप से नामित किए गए द्वीप.
ये द्वीप भविष्य की पीढ़ियों को याद दिलाते रहेंगे कि देश को स्वतंत्र और सुरक्षित रखने के लिए किन-किन लोगों ने अपनी जान तक दे दी।

