DehradunCrimeNews : मामूली विवाद से मचा खूनी बवाल! Dehradun की सड़क पर गूंजी गोलियां, दो घायल :- देहरादून में पिछले कुछ दिनों से लगातार ऐसी वारदातें सामने आ रही हैं, जिन्होंने पूरे शहर में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। कहीं दिनदहाड़े मारपीट, कहीं चाकूबाजी, तो कहीं खुलेआम फायरिंग—लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाएं राजधानी की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं।
इसी बीच अब रायपुर थाना क्षेत्र से एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। रिंग रोड स्थित छह नंबर पुलिया के पास एक वाइन शॉप के बाहर शुक्रवार शाम मामूली कहासुनी अचानक खूनी फायरिंग में बदल गई। देखते ही देखते बीच सड़क ताबड़तोड़ गोलियां चलने लगीं। गोलियों की आवाज सुनते ही आसपास मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
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सबसे दुखद और चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस विवाद से दो राहगीरों का कोई लेना-देना नहीं था, वही गोलियों का शिकार बन गए। इस फायरिंग में 39 वर्षीय नवीन राणा के कंधे में गोली लगी, जबकि 25 वर्षीय कविंद्र शर्मा के पैर में गोली लगी। दोनों घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक दोनों की हालत फिलहाल स्थिर है।
घटना की सूचना मिलते ही रायपुर थाना पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पूरे इलाके की घेराबंदी की गई और घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा भी फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोग वाइन शॉप के बाहर धरने पर बैठ गए और ठेका हटाने की मांग करने लगे। उनका कहना है कि इस शराब के ठेके को लेकर पहले भी कई बार शिकायत की जा चुकी है। आरोप है कि यहां आए दिन झगड़े और मारपीट जैसी घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
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अब इलाके के लोग प्रशासन से दो मांगें कर रहे हैं—पहली, इस वाइन शॉप को यहां से हटाया जाए और दूसरी, क्षेत्र में पुलिस गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
एक मामूली विवाद का इस तरह गोलीबारी में बदल जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या राजधानी की सड़कों पर आम नागरिक अब सुरक्षित हैं? क्या संवेदनशील स्थानों पर समय रहते सख्त कार्रवाई की जाएगी? और सबसे बड़ा सवाल—आखिर कब तक बेगुनाह लोग दूसरों के झगड़ों का शिकार बनते रहेंगे?

