VPNBanInIndia : VPN का गलत इस्तेमाल करने वालों पर शिकंजा :- VPN यानी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का उपयोग करके इंटरनेट चलाने और गलत कामों को करने वालों पर शिकंजा और तेजी से कस सकता है। सरकार ऐसी कंपनियों पर सख्ती के लिए नया कानून बनाने जा रही है जो वीपीएन सर्विस भारत में दे रही हैं, लेकिन अपने कंस्यूमर्स का डेटा रिकॉर्ड में नहीं रखतीं।
नए नियम लागू हुए तो VPN सर्विस देने वाली कंपनियों को देश में अपना ऑफिस खोलना पड़ सकता है। सरकारी अधिकारियों के साथ तालमेल बैठाने के लिए कंप्लायंस ऑफिसर रखने पड़ सकते हैं।
क्यों उठाया जा रहा यह कदम ?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 में सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी (CERT-In) ने एक नियम निकाला था, जिसमें वीपीएन कंपनियों से अपने ग्राहकों का पूरा डेटा रिकॉर्ड में रखने को कहा गया था। लेकिन उसका कोई खास फायदा नहीं हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, ‘प्रोटॉन’, ‘नॉर्ड’, ‘एक्सप्रेस’ और ‘सर्फशार्क’ जैसी बड़ी वीपीएन कंपनियों ने भारत से अपने असली सर्वर हटा लिए और भारतीय यूजर्स का डेटा सिंगापुर के रास्ते चलाना शुरू कर दिया।
इसका नुकसान यह हुआ कि जब भी सरकार ने सुरक्षा या अन्य वजह से किसी ऐप, सोशल मीडिया अकाउंट या वेबसाइट को ब्लॉक किया है तो लोग वीपीएन का इस्तेमाल करके उसे आसानी से चला लेते हैं।
इससे सरकार का उन्हें ब्लॉक करने का मकसद ही फेल हो जाता है। हाल ही में टेलीग्राम पर लगाए गए बैन के दौरान यही देखने को मिला। बैन के बावजूद बहुत से लोगों ने दावा किया कि वो टेलीग्राम को आराम से इस्तेमाल कर रहे हैं।
पूर्व में ऐसे कई मामले आए हैं जिनमें VPN के जरिए धोखाधड़ी की कोशिश हुई। देश में आयोजित होने वाली बड़ी परीक्षाओं में बाधा डालने के लिए भी वीपीएन का गलत इस्तेमाल कई बार हुआ है।
RE NEET से पहले भी हुई गड़बड़ी की कोशिश
न्यूज रिपोर्टों के अनुसार, पिछले महीने जब नीट की दोबारा होने वाली परीक्षा के कुछ दिन बचे थे, उस दौरान राजस्थान के भीलवाड़ा में 19 साल का छात्र ‘पेपर लीक’ का एक शातिर खेल खेल रहा था। उसने अपने कमरे में रखी नीट की तैयारी की एक साधारण गाइड के पन्नों को अपने मोबाइल से स्कैन किया। उन्हें एडिट करके ऐसा लुक दिया कि वे परीक्षा से पहले लीक हुए ‘ओरिजिनल प्रश्नपत्र’ लगें। फिर उन्हें सोशल मीडिया पर फैलाना शुरू कर दिया। इसके बाद उसने टेलीग्राम पर नकली पेपर सर्कुलेट किया।
नए नियमों में क्या हो सकता है ?
भारत में ऑफिस जरूरी: सभी वीपीएन कंपनियों को भारत में अपना सेटअप या ऑफिस बनाना होगा।
लोकल अधिकारी की नियुक्ति: कंपनियों को भारत में अपने अधिकारी रखने होंगे, ताकि सरकार जब भी किसी ब्लॉक कंटेंट को रोकने के लिए कहे, तो वे तुरंत एक्शन ले सकें।
जेल की सजा का प्रावधान: अगर कंपनियां सरकार की बात नहीं मानती हैं, तो भारत में मौजूद उनके कर्मचारियों को जेल भी हो सकती है।

