IASIPSMarriage : IAS-IPS को शादी से पहले लेनी होती है इजाजत ! :- भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का पद न केवल रौब और रसूख का प्रतीक है, बल्कि यह बेहद सख्त अनुशासन की नींव पर टिका होता है। जहाँ एक आम नागरिक के लिए शादी पूरी तरह से एक निजी फैसला है, वहीं इन शक्तिशाली अधिकारियों के लिए यह ‘अंतिम फैसला’ लेने से पहले सरकार की दहलीज पर दस्तक देना अनिवार्य हो जाता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि एक बार अफसर बन गए तो दुनिया कदमों में है, लेकिन हकीकत यह है कि ‘ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स, 1968’ की बेड़ियाँ उन्हें निजी जीवन में भी संभलकर चलने पर मजबूर करती हैं। इसकी के तहत अगर आईएएस और आईपीएस को शादी भी करनी होती है तो उन्हें सरकार से इजाजत लेनी होती है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश के दो चर्चित आईपीएस अधिकारियों कृष्ण कुमार बिश्नोई और अंशिका वर्मा की शादी इन दिनों चर्चा में है। राजस्थान में होने जा रहे इस शाही विवाह समारोह में कई बड़े राजनेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के शामिल होने की संभावना है। हालांकि किसी भी आईएएस या आईपीएस अधिकारी के लिए शादी केवल निजी फैसला नहीं होता, बल्कि इसके लिए सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन भी करना पड़ता है।
जब दो आईएएस या आईपीएस अधिकारी आपस में विवाह करते हैं, तो सबसे बड़ा सवाल उनके कैडर यानी कार्यक्षेत्र को लेकर खड़ा होता है। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के नियमों के अनुसार, शादी के बाद अधिकारी अक्सर एक ही राज्य में तैनाती की मांग करते हैं। सरकार को इस स्थिति में तबादलों का संतुलन इस तरह करना पड़ता है कि दंपती साथ रह सकें, लेकिन उन्हें उनके गृह राज्य में पोस्टिंग न मिले। इससे प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखने में मदद मिलती है।
सरकारी सेवा में अधिकारियों को अपनी शादी की जानकारी देना इसलिए भी जरूरी होता है ताकि ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ यानी हितों के टकराव की स्थिति से बचा जा सके। सरकार यह सुनिश्चित करती है कि किसी अधिकारी के वैवाहिक संबंध उसके सरकारी फैसलों को प्रभावित न करें। इस नियम का उद्देश्य यह भी है कि कोई अधिकारी अपने पद का इस्तेमाल जीवनसाथी या उसके परिवार को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए न कर सके।
विदेशी नागरिक से शादी पर सख्त नियम
अगर कोई आईएएस या आईपीएस अधिकारी किसी विदेशी नागरिक से शादी करना चाहता है, तो नियम और भी सख्त हो जाते हैं। ऐसे मामलों में अधिकारी को सरकार से औपचारिक अनुमति लेने के साथ सुरक्षा एजेंसियों से क्लीयरेंस भी लेनी पड़ती है। सरकार यह सुनिश्चित करती है कि देश की गोपनीय सूचनाओं या रणनीतिक हितों पर किसी तरह का जोखिम न हो। इस प्रक्रिया में कई जांच एजेंसियों की रिपोर्ट शामिल होती है, इसलिए इसमें समय भी लग सकता है।
आचार संहिता का पालन जरूरी
आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के लिए एक निर्धारित आचार संहिता होती है। शादी की जानकारी सरकार को देना उसी पारदर्शिता का हिस्सा माना जाता है। यदि कोई अधिकारी अपनी शादी या संपत्ति से जुड़ी जानकारी छिपाता है, तो इसे अनुशासनहीनता माना जा सकता है और इसका असर उसके करियर पर पड़ सकता है।
शादी के आधार पर कैडर बदलने की छूट
आमतौर पर एक बार कैडर मिलने के बाद उसे बदलना लगभग असंभव होता है। लेकिन शादी एक ऐसा आधार है, जिस पर सरकार कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट देती है। नियमों के अनुसार यदि पति-पत्नी दोनों अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी हैं, तो उन्हें ‘मैरिज ग्राउंड’ पर एक ही कैडर में आने की अनुमति मिल सकती है। हालांकि इसके लिए यह शर्त होती है कि मांगा गया कैडर दोनों में से किसी का भी गृह राज्य नहीं होना चाहिए, ताकि स्थानीय प्रभाव और पक्षपात की संभावना खत्म हो सके।

