UttrakhandPolitics : हरीश रावत को अच्छा लगा प्रधानमंत्री का भाषण :- राजनीति के मंझे हुए बयान बहादुर खिलाड़ी और उत्तराखंड के सबसे बड़े माने जाने वाले कांग्रेस नेता हरीश रावत ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर अपने मन की बात लिखी है जिसमें इशारों इशारों में कई इशारे भी किये हैं। बीते कुछ दिनों में हरदा के इर्द गिर्द कई ख़ास नेताओं को भी देखा गया और उनके बयानों से भविष्य की संभावनाओं पर टीका टिप्पणी भी सुनाई दी है। लेकिन बात यहाँ बीते मंगलवार को धामी सरकार के मेगा इवेंट देहरादून–दिल्ली एक्सप्रेस हाईवे के उद्घाटन में पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी के भाषण पर पूर्व सीएम हरीश रावत की समीक्षा पर करेंगे।
हरदा लिखते हैं – मैंने माननीय प्रधानमंत्री जी के भाषण को बहुत गौर से सुना, उससे पहले मैंने पुष्कर सिंह धामी जी के भाषण को भी गौर से सुना। मोदी जी और नितिन गडकरी जी, दोनों उपस्थित होने के बावजूद धामी जी आदि कैलाश-बागेश्वर-कोसी-रामनगर-दिल्ली एक्सप्रेस हाईवे और दोनों मंडलों को सीधे जोड़ने वाला कंडी मार्ग, कोटद्वार–रामनगर माँगना भूल गए। यदि यहाँ एलिवेटेड रोड बन सकती है। पहले हमारे समय में भी देहरादून–हरिद्वार के बीच कुछ स्थानों पर एलिवेटेड स्ट्रक्चर बने हैं, तो प्रस्तावित कंडी मार्ग में भी एलिवेटेड स्ट्रक्चर बन सकता है। वन्य जीव भी खुश और दोनों संभागों का विकास भी खुश। मुख्यमंत्री जी भीड़ जुटाने की थकान में शायद यह चूक कर गए।
देहरादून–दिल्ली एक्सप्रेस हाईवे हमारे लिए वरदान भी है, साथ ही कई प्रकार की समस्याओं का आमंत्रण भी है। खैर, उन पर मैं बाद में बात करूंगा, क्योंकि आप सब इस समय इस सौगात को सेलिब्रेट करना चाह रहे होंगे। देवभूमि में प्रधानमंत्री जी के भाषण में मुझे यह अच्छा लगा कि उन्होंने विपक्ष को कोसने के बजाय सामूहिकता की बात कही अन्यथा प्रधानमंत्री हों या भाजपा का कोई और नेता, वे तो पानी पी-पीकर विपक्ष को कोसते हैं। माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी, माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी यहाँ आए। दे तो कुछ नहीं गये, मगर मुझे कोसने से नहीं चूके।
माननीय मुख्यमंत्री जी ने तो परेड ग्राउंड में मेरी शान में पूरा पाठ ही पढ़ डाला था। कोई बात नहीं, राज्य में हम और वे पक्ष-विपक्ष हैं। मगर प्रधानमंत्री के श्रीमुख से विरोधियों के लिए कटु वाक्य चुभते हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री सामूहिकता का प्रतीक होता है। इस बार प्रधानमंत्री जी ने विपक्ष से सहयोग माँगा, अच्छा लगा। महिला वंदना विधेयक अर्थात महिला आरक्षण पर सारा विपक्ष सरकार के साथ है, सारा देश एकजुट है। परिसीमन जैसे संवेदनशील मामले में आप कैसे सहमति बनाते हैं, यह आपके नेतृत्व की परीक्षा है। छोटे राज्यों और दक्षिण के राज्यों सहित कई राज्यों की आवाज संख्या बल के कारण कमजोर पड़ जाएगी। हमारे संविधान का संघीय ढांचा संतुलन आधारित है, परिसीमन में संतुलन न बिगड़े, इसका ध्यान रखना आवश्यक है।
प्रधानमंत्री जी ने अप्रत्यक्ष तौर पर कुछ बातें कही, मगर अपने प्रिय पुष्कर के नाम के साथ उन बातों को नहीं जोड़ा। लगता है उत्तराखंड भाजपा के अंदर जो सिर फुटव्वल हो रही है, उसका असर प्रधानमंत्री जी पर था। उम्मीद करता हूँ कि एलिवेटेड एक्सप्रेस हाईवे के फ्रंटों के बाद देहरादून के अंदर जो नए bottlenecks खड़े होंगे, जाम से घंटों लोगों का दम घुटेगा, उसका भी समाधान यथाशीघ्र निकाला जाएगा। 9 वर्ष से ज़्यादा हो गए—कांग्रेस की सरकार ने कुछ फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए थे, मगर उसके बाद इस प्रक्रिया में विराम लग गया है। प्रधानमंत्री जी से मैं उम्मीद कर रहा था कि वे इस मार्ग को बाबा साहब अंबेडकर जी को समर्पित करेंगे। खैर, आगे कांग्रेस की सरकार इस पुण्य कार्य को पूरा करेगी।

