By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
khojinarad HIndi Newskhojinarad HIndi Newskhojinarad HIndi News
  • उत्तराखण्ड
    • देहरादून
    • रुड़की
    • चमोली
    • रुद्रप्रयाग
    • टिहरी गढ़वाल
    • पौड़ी गढ़वाल
    • उत्तरकाशी
    • अल्मोड़ा
    • उधम सिंह नगर
    • चम्पावत
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • बागेश्वर
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्ली
    • पंजाब
    • महाराष्ट्र
  • अंतराष्ट्रीय
  • तत्काल प्रभाव
  • खोजी नारद कहिंन
  • तत्काल प्रभाव
  • More
    • बकैती
    • भांडा फोड़
    • लफ्फाज़ी
    • वीडियो
Reading: इंसानों के मरने से धरती पर बोझ होता है कम?
Share
Notification Show More
Aa
khojinarad HIndi Newskhojinarad HIndi News
Aa
Search
  • उत्तराखण्ड
  • खोजी नारद कहिंन
  • तत्काल प्रभाव
  • इंटरव्यू
  • बकैती
  • भांडा फोड़
  • लफ्फाज़ी
  • वीडियो
Follow US
  • Advertise
© 2024 Khoji narad. All Rights Reserved.
khojinarad HIndi News > राष्ट्रीय > इंसानों के मरने से धरती पर बोझ होता है कम?
राष्ट्रीय

इंसानों के मरने से धरती पर बोझ होता है कम?

क्या लोगों के मरने से वाकई कम होता है धरती का बोझ? जान लीजिए इस बात का सच.

admin
Last updated: 2025/12/02 at 12:47 PM
admin
Share
3 Min Read
इंसानों के मरने से धरती पर बोझ होता है कम
इंसानों के मरने से धरती पर बोझ होता है कम
SHARE
Highlights
  • इंसानों की मृत्यु और पृथ्वी पर बोझ.
  • क्या इंसानों की मृत्यु से पृथ्वी पर बोझ कम होता है?
  • इंसानों के मरने से धरती पर बोझ होता है कम?

इंसानों के मरने से धरती पर बोझ होता है कम? : आपने कई बार अपने बुजुर्गों या आस-पास के लोगों को ये कहते हुए सुना होगा कि मरने से धरती का बोझ कम होता है. अब सवाल ये है कि क्या सच में इंसानों के मरने से धरती का बोझ कम होता है. आज हम आपको बताएंगे कि मरने से धरती का बोझ कम होता है या नहीं होता है. आखिर लोग ये लाइन क्यों बोलते हैं।

Contents
कितना है धरती का वजनइंसानों के मरने से धरती पर बोझ होता है कम?सौ सालों में बढ़ी आबादी

धरती पर इंसानों की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अभी धरती पर आखिर कितने करोड़ लोग रहते हैं. आज हम आपको पहले ये बताएंगे कि आखिर धरती पर इंसानों की जनसंख्या कितनी है. बता दें कि वर्तमान में दुनिया की आबादी 800 करोड़ से ज्यादा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक आने वाले 20 सालों में ये संख्या 900 करोड़ पार कर जाएगी।

कितना है धरती का वजन

अब सवाल ये है कि धरती का वजन कितना है? धरती का वजन कितना है, इसको लेकर वैज्ञानिकों के दावे अलग-अलग हैं. दरअसल धरती का वजन उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति की ताकत पर निर्भर करता है. आसान भाषा में कहे तो धरती का वजन लाखों करोड़ों किलोग्राम होता है. वहीं नासा के मुताबिक धरती का वजन 5.9722×1024 किलोग्राम है. इसे 13.1 सेप्टिलियन पाउंड में भी नापते हैं. धरती का वजन थोड़ा कम-ज्यादा होता रहता है।

इंसानों के मरने से धरती पर बोझ होता है कम?

आपने कई बार लोगों को ये कहते हुए सुना होगा कि मरने से धरती का बोझ कम होता है. या कुछ लोग ये कहते हैं कि ये इंसान धरती पर बोझ है. लेकिन साइंस के मुताबिक ये लाइन सिर्फ आम बोलचाल की भाषा तक ही ठीक है. दरअसल लोगों के मरने या पैदा होने से धरती के बोझ पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता है. धरती का जो वजन है, वो गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण कम और अधिक होता रहता है. इसका मौत से कोई भी कनेक्शन नहीं है।

सौ सालों में बढ़ी आबादी

वैज्ञानिकों के मुताबिक पहले धरती पर आबादी ज्यादा नहीं थी. पहले धरती पर इंसानों की आबादी बहुत कम थी. वैज्ञानिकों के मुताबिक दस हज़ार साल पहले तक धरती पर महज़ कुछ लाख इंसान थे. वहीं अठारहवीं सदी के अंत में आकर धरती की आबादी ने सौ करोड़ का आंकड़ा छुआ था. वहीं 1920 में जाकर धरती पर दो सौ करोड़ लोग हुए थे।

You Might Also Like

PeacefulDeath : कुछ लोगों की मौत शांति से कुछ की बहुत कष्टदायक क्यों होता है

IndiaFirstTelephone: किस भारतीय ने लिया था पहला टेलीफोन कनेक्शन

YoungSherlock : क्या है यंग शेरलॉक सीरीज की कहानी ?

IranUSWar : जारी जंग के बीच इंडिया विक्स की चर्चा क्यों ?

DefenceAcquisition : क्या है समुद्री निगरानी की आँखें  P-8I का महत्व ?

TAGGED: #इंसानोंकीमृत्यु, #जनसंख्या और पर्यावरण, #जनसंख्या नियंत्रण, #जनसंख्याबदलाव, #जनसंख्यावृद्धि, #पर्यावरणसंतुलन, #पर्यावरणसुरक्षा, #पर्यावरणीयप्रभाव, #पर्यावरणीयसंतुलन, #पृथ्वीपरजनसंख्या, #पृथ्वीपरप्रभाव, #पृथ्वीपरबोझ, #मृतुदर, #संसाधनउपयोग, #संसाधनखपत, #संसाधनसंतुलन, khoji narad, khoji narad breaking news

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.
[mc4wp_form]
By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
admin December 2, 2025 January 31, 2025
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article उत्तराखण्ड की झांकी को सम्मान उत्तराखण्ड की झांकी को सम्मान – डीजी बंशीधर तिवारी ने लिया अवार्ड
Next Article 10वीं के बाद भारतीय सेना में कैसे शामिल हों 10वीं के बाद भारतीय सेना में कैसे शामिल हों ?

Advt.

Advt.

https://khojinarad.com/wp-content/uploads/2025/10/Vertical-V1-MDDA-Housing-1.mp4

Advt.

https://khojinarad.com/wp-content/uploads/2025/10/MDDA-Final-Vertical-2-1.mp4

Latest News

RahmanDakait
RahmanDakait : Dhurandhar 2 में लौटेगा रहमान डकैत !
राष्ट्रीय March 7, 2026
PMViksitBharatRozgarYojana
PMViksitBharatRozgarYojana : केवाईसी न होने पर फंस सकती है प्रोत्साहन राशि
देहरादून March 7, 2026
UttarakhandSolarSubsidy
UttarakhandSolarSubsidy : सरप्लस बिजली का नया रेट 2 रुपये प्रति यूनिट
देहरादून March 7, 2026
PeacefulDeath
PeacefulDeath : कुछ लोगों की मौत शांति से कुछ की बहुत कष्टदायक क्यों होता है
अंतराष्ट्रीय March 7, 2026
//

Khoji Narad is a Uttarakhand-based news website that delivers comprehensive coverage of national and international news. With a focus on accurate, timely, and in-depth reporting, Khoji Narad offers insights into politics, business, culture, and more, while also highlighting the unique stories from the heart of Uttarakhand.

Quick Link

  • इंटरव्यू
  • खोजी नारद कहिंन
  • बकैती
  • भांडा फोड़
  • लफ्फाज़ी
  • वीडियो

Top Categories

  • उत्तराखण्ड
  • अंतराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • महाराष्ट्र

Contact

Smriti Sahgal (Editor)
Address: 207/4, Vijaypur, Gopiwala, Anarwala Dehradun-248001, Uttarakhand
Phone: 9837663626
Email: indiankhojinarad@gmail.com

 

khojinarad HIndi Newskhojinarad HIndi News
Follow US
© 2024 Khoji Narad. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Register Lost your password?