NiraiMataTemple : घना जंगल, पहाड़ी, सुबह का अंधेरा, भक्तों की भीड़ : – “सोचिए… एक ऐसा मंदिर…जहां सालभर ताला लगा रहता है… जहां देवी की कोई मूर्ति नहीं…और जहां महिलाओं का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित है…ये कोई कहानी नहीं… बल्कि हकीकत है छत्तीसगढ़ के धमतरी में स्थित निरई माता मंदिर की… जहां आस्था और रहस्य आज भी विज्ञान को चुनौती देते हैं।
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”छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के मगरलोड क्षेत्र में घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित है निरई माता मंदिर… एक ऐसा स्थल जो अपनी अनोखी परंपराओं के कारण देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह मंदिर साल में सिर्फ एक बार… चैत्र नवरात्र के पहले रविवार को खुलता है… वो भी सिर्फ 5 घंटे के लिए… सुबह 4 बजे से 9 बजे तक। इस दौरान हजारों श्रद्धालु कठिन रास्तों को पार कर माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
लेकिन इस मंदिर की सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि यहां महिलाओं का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित है। केवल पुरुष ही यहां पूजा-अर्चना कर सकते हैं। मंदिर के भीतर कोई मूर्ति नहीं है… बल्कि एक पवित्र गुफा में जलती हुई ज्योति ही माता का स्वरूप मानी जाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार… ये ज्योति बिना घी, तेल या माचिस के अपने आप प्रज्वलित होती है… और पूरे नवरात्र तक जलती रहती है।
इस रहस्य को आज तक कोई सुलझा नहीं पाया… लेकिन श्रद्धालुओं के लिए ये माता का चमत्कार है। कहा जाता है कि एक समय यहां एक बैगा पुजारी माता की सच्चे मन से सेवा करता था…
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माता स्वयं उसकी सेवा करने आती थीं…लेकिन जब पुजारी की पत्नी को इस पर संदेह हुआ… तो देवी क्रोधित हो गईं… और उन्होंने श्राप दिया कि भविष्य में कोई भी महिला उनके दर्शन नहीं कर पाएगी…तभी से ये परंपरा आज तक चली आ रही है।
“आस्था… रहस्य… और परंपरा का ये संगम…निरई माता मंदिर को बनाता है बेहद खास…जहां एक ओर श्रद्धा सिर झुकाती है… तो वहीं दूसरी ओर इसके रहस्य आज भी अनसुलझे हैं… क्या ये चमत्कार है… या कोई अनजाना विज्ञान? ये सवाल आज भी कायम है…

