सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 370 हटाए जाने को लेकर 23 याचिकाएं दाखिल कर दी गई हैं।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने बताया कि याचिकाओं पर सुनवाई सोमवार और शुक्रवार को छोड़कर रोजाना की जाएगी। क्योंकि सोमवार और शुक्रवार को शीर्ष अदालत में अलग-अलग मामलों पर सुनवाई होती है इसी कारण इन दोनों दिनों को छोड़कर बाकी सभी दिन यह प्रक्रिया की जाएगी।
इसके साथ ही पीठ ने दो वकीलों को नियुक्त किया है, जिसमें से एक सरकार की ओर से है और एक याचिकाकर्ता की और से है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि 7 जुलाई के बाद कोई दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने बताया कि दो याचिकाकर्ताओं आईएएस ,शाह फैसल और कार्यकर्ता शेहला राशिद शोरा ने याचिकाकर्ताओं की सूची में अपना नाम वापस लेने के लिए एक आवेदन भी दिया गया है।
वहीं केंद्र की ओर से आए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगर कोई याचिकाकर्ताओं की सूची से अपना नाम वापस लेना चाहता है तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर में पुरानी स्थिरता का दौर है। आखिरकार तीन दशकों की के बाद क्षेत्र में जीवन सामान्य और सरल सा हो गया है।
राज्य में लगातार उन्नति, प्रगति हो ही रही है। तीन सालों में स्कूल, कॉलेज और अन्य सार्वजनिक संस्थान अच्छे से कामकाज कर रहे हैं। पथराव की कोई घटना नहीं हुई है। केंद्र का जवाब अनुच्छेद 370 निरस्त करने के फैसले को चुनौती देने वाली 20 से अधिक याचिकाओं पर आया है।
जस्टिस संजय किशन कौल, सीजेआई डीवाई चंद्रमूड, जस्टिस संजीव खन्ना , जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की संविधान पीठ जम्मू- कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने वाले फैसले को चुनौती देने वाली 20 से ज्यादा याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

