‘Saiyaara’ पर बोले बाबा – ये फिल्म नहीं प्रेम का पाठ है! :- नमस्कार दोस्तों! आप देख रहे हैं खोजी नारद, और मैं हूँ अनन्या सहगल—आज एक ऐसी खबर लेकर आई हूँ जो प्रेम, सिनेमा और अध्यात्म के संगम पर खड़ी है। एक ओर है ‘सैयारा’—बॉलीवुड की नई धड़कन… और दूसरी ओर हैं परम बाबा—जिन्होंने सिनेमा हॉल की चौखट पर कदम रख कर उस पीढ़ी को चौंका दिया जो मानती है कि ‘बाबा लोग सिर्फ ध्यान लगाते हैं’। लेकिन इस बार बाबा का ध्यान पर्दे पर था… और उनका संदेश दिलों के भीतर तक गया। 18 जुलाई को रिलीज हुई ‘सैयारा’, पहले ही सात दिनों में बॉक्स ऑफिस पर 170 करोड़ से ज़्यादा कमा चुकी है।
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हर शो हाउसफुल, हर आंख नम… लेकिन अब इस फिल्म से जुड़ गई है एक नई परत—आध्यात्म की। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में परम बाबा खुद थिएटर में बैठे दिखे। फिल्म खत्म होने के बाद कैमरे की ओर मुड़कर उन्होंने कहा— लेकिन ये मूवी सिर्फ मनोरंजन नहीं, एक संदेश है—प्रेम क्या होता है, ये जानने का रास्ता है।” बाबा ने कहा—“आज के युवा 4-4 अफेयर रखते हैं… पर असली प्यार क्या होता है, ये भूल गए हैं।
‘सैयारा’ जैसे सिनेमा हमें वो प्रेम दिखाता है जिसमें समर्पण है, संघर्ष है और एक आंतरिक यात्रा है—जिसके जरिए हम खुद से और परमात्मा से जुड़ सकते हैं।” इस पीढ़ी को प्रेम का गूढ़ ज्ञान सिखाने के लिए ये फिल्म जरूरी है। मैं चाहता हूं देश का हर युवा इसे देखे—ताकि उन्हें एहसास हो कि असली प्रेम ‘स्वार्थ’ नहीं, ‘समर्पण’ होता है कई युवा इस फिल्म को देखकर थिएटर में रोते नज़र आए। कुछ ने सोशल मीडिया पर लिखा—“ये फिल्म नहीं, आइना है हमारे अधूरे रिश्तों का।” यह फिल्म केवल एक प्रेम कहानी नहीं है, ये उस अधूरेपन को पूरा करती है जो आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में खो गया है।
सैयारा’ की कहानी में अहान पांडे का किरदार कृष कपूर एक संघर्षशील गायक है, जबकि अनीत पड्डा की वाणी—एक लेखिका, जो शब्दों से दिलों को छूती है। उनका मिलना, बिछड़ना और फिर आत्मा से जुड़ जाना—यही फिल्म की आत्मा है। लेकिन सवाल ये उठता है—क्या आज की पीढ़ी इस फिल्म से कुछ सीख पाएगी? या ये फिल्म भी बाकी कहानियों की तरह सिर्फ़ एक रोमांटिक सपने बनकर रह जाएगी? बाबा ने एक बात और कही— “प्रेम अगर सच्चा हो, तो वो भटकाता नहीं… जोड़ता है। और वही प्रेम आपको ईश्वर से जोड़ सकता है।”
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तो दोस्तों… सैयारा अब सिर्फ एक फिल्म नहीं रही—ये एक आंदोलन बन चुकी है। एक ऐसा सिनेमाई अनुभव जो हमें सिर्फ हँसाता-रुलाता नहीं… बल्कि जगाता है। मैं अनन्या सहगल, आपसे यही कहूँगी—अगर आपने ‘सैयारा’ नहीं देखी, तो इस बार किसी गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड के लिए नहीं… अपने आप से मिलने के लिए जाइए। क्योंकि जहाँ प्रेम सच्चा होता है, वहीं आत्मा बोल उठती है—“मैं हूँ… सैयारा।” फिर मिलेंगे, एक नई खोज के साथ… सिर्फ ‘खोजी नारद’ पर।

