DecisionFatigue : क्या आप भी ‘Decision Fatigue’ के शिकार हैं ? :- वर्तमान समय में हम सभी अपने करियर, घर-परिवार और अन्य कारणों के बारे में हम काफी ज्यादा सोचने लगते हैं। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हमारा दिमाग शांत नहीं रह पाता है। क्या पहनना है, कहां जाना है, कैसे जाना है, किसके साथ मीटिंग है, किस काम को पहले करना है, खाने में क्या खाना आदि छोटे-छोटे फैसलों को लेने के कारण दिमाग काफी ज्यादा थक जाता है। इसी मानसिक थकान को मेडिकल की भाषा में डिसीजन फटीग (Decision Fatigue) कहा जाता है। यह कोई बड़ी मानसिक बीमारी नहीं है, बल्कि इस समस्या में व्यक्ति रोजमर्रा के नॉर्मल डिसीजन लेने में भी काफी मुश्किल हो जाती है।
डिसीजन फटीग की समस्या आमतौर पर तब होती है, जब आपका दिमाग बार-बार अपने कामों को करने के विकल्पों के बीच किसी एक ऑप्शन को चुनने को लेकर थक जाता है। हमारे फैसले लेने की क्षमता मानसिक ऊर्जा पर निर्भर होती है। ऐसे में यह मेंटल एनर्जी कम होने लगती है तो हमारे सोचने-समझने की शक्ति, फैसला लेने की शक्ति और धैर्य पर भी इसका असर पड़ता है।
डिसीजन फटीग के लक्षण क्या हैं ?
NCBI रिसर्च के अनुसार, “डिसीजन फटीग मानसिक एनर्जी को कम कर देता है, जिसके कारम व्यक्ति की वीलपावर और सही फैसला लेने की क्षमता कम होने लगती है। यह थकान व्यक्ति को गलत फैसले लेने के लिए मजबूर कर देती है।” इसलिए, डिसीजन फटीग की समस्या होने पर आपके शरीर में कई तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे-
1. मानसिक थकान :- लगातार फैसले लेने के बाद दिमाग में भारीपन महसूस होता है। इस स्थिति में व्यक्ति को सोचने में ज्यादा समय लगता है और नॉर्मल काम करने में भी मुश्किल होती है।
2. बातें टालना :- जब फैसला लेने की ताकत हमारे अंदर कम हो जाती है तो व्यक्ति फैसले टालने लगता है, जिसके कारण हर काम को वो बाद में देखेंगे, अभी मन नहीं कर रहा आदि तरह के बहाने बनाने लगता है।
3. गलत फैसले लेना :- दिमाग पर जोर पड़ने के कारण कई बार हम जल्दबाजी में फैसले लेने लगते हैं, जैसे डाइट पर होते हुए भी जंक फूड खाना, बिना सोचे-समझें शॉपिंग करना या किसी काम के लिए हां या न करना।
4. फैसले लेने से बचना :- डिसीजन फटीग के कारण आपके फैसले लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है, जिस कारण कई लोग अक्सर निर्णय लेने से पूरी तरह बचने लगते हैं। ऐसे में वे दूसरों पर जिम्मेदारी डाल देते हैं या अन्य विकल्पों से दूरी बना लेते हैं।
5. खुद पर कम विश्वास होना :- इस समस्या के कारण बार-बार अपने फैसलों पर शक होना, खुद को दोष देना या हर फैसले के बाद सही डिसीजन लिया या नहीं इस बारे में सोचना भी इसका एक बड़ा संकेत है।
6. शारीरिक लक्षण :- डिसीजन फटीग की समस्या के कारण व्यक्ति को सिर में दर्द, फोकस करने में मुश्किल होना, नींद में कमी और रोजमर्रा के कामकाज में समस्या होने जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।

