SonamWangchukHungerStrike : 26 दिन बाद टूटा Sonam Wangchuk का अनशन! आखिर क्यों बदला फैसला? :- 26 दिनों तक चला अनशन… पूरे देश की निगाहें एक आंदोलन पर टिकी रहीं… और अब आखिरकार सोनम वांगचुक ने अपना उपवास समाप्त कर दिया है। लेकिन क्या सरकार ने उनकी सभी मांगें मान लीं? आखिर ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने अपना फैसला बदल दिया? और अब इस आंदोलन का अगला कदम क्या होगा? आइए जानते हैं पूरी खबर।
देशभर में चर्चा का विषय बने पर्यावरणविद्, शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चले अपने भूख हड़ताल को समाप्त कर दिया है। यह अनशन छात्रों के मुद्दों, पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और आंदोलनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर किया जा रहा था।
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अनशन खत्म करने के बाद सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्होंने यह फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि देशहित और शांति को ध्यान में रखते हुए लिया है। उनका कहना था कि यदि आंदोलन आगे बढ़ता, तो देश में तनाव और हिंसा की आशंका बढ़ सकती थी। इसी संभावना को देखते हुए उन्होंने अपना उपवास समाप्त करने का निर्णय लिया।
वांगचुक ने बताया कि इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की या फिर संदेश भेजकर अनशन खत्म करने की अपील की। लंबे विचार-विमर्श और कई दौर की बातचीत के बाद उन्होंने सरकार की ओर से मिले कुछ आश्वासनों के आधार पर यह फैसला लिया।
दिल्ली के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने अपना अनशन तोड़ा। इस मौके पर उन्होंने अपने समर्थकों, डॉक्टरों, स्वयंसेवकों और अपनी पत्नी गीतांजलि का विशेष रूप से धन्यवाद किया, जिन्होंने पूरे आंदोलन के दौरान उनका साथ दिया।
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सोनम वांगचुक के अनुसार, सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सकारात्मक रुख दिखाया है। इनमें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और आंदोलन में शामिल लोगों पर नए मुकदमे दर्ज न करने का आश्वासन शामिल है। इसके अलावा संसद में पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने की बात भी कही गई है।
वांगचुक ने यह भी मांग दोहराई कि पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण जिन छात्रों और उनके परिवारों को नुकसान उठाना पड़ा है, उनके लिए न्याय सुनिश्चित किया जाए और शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए।
हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि अनशन समाप्त होने का मतलब आंदोलन का अंत नहीं है। उनका कहना है कि यह लड़ाई अब लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से आगे बढ़ेगी। यदि सरकार अपने वादों को पूरा नहीं करती, तो आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार अपने आश्वासनों को कितनी गंभीरता से लागू करती है और क्या छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं। आने वाले दिनों में संसद और सरकार की कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।

