MoonEffectsOnMind : चांद कैसे करता है मन और भाग्य को प्रभावित ? :- हिन्दू धर्म में कई लोग चंद्रमा की पूजा करते हैं। करवाचौथ में महिलाएं चांद देखकर ही व्रत तोड़ती हैं। कई बार चंद्रमा का आकार घटता-बढ़ता नजर आता है, जिसे चंद्रमा की कलाएं कहा जाता है। लाल किताब के हिसाब से चंद्रमा का घटना-बढ़ना कोई सामान्य स्थिति नहीं है। लाल किताब में चांद को मन और मां का कारक माना गया है। इसी वजह से माना जाता है कि चंद्रमा के घटने-बढ़ने का सीधा असर लोगों के मन और किस्मत पर पड़ता है, जिससे व्यक्ति की फैसले लेने की क्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है।
वैदिक ज्योतिष के हिसाब से चांद को ‘चन्द्रमा मनसो जात:’ माना गया है, यानी चांद की उत्पत्ति कालपुरुष के मन से हुई है। इसी वजह से चांद की बदलती स्थिति हमारे मन और भावनाओं पर प्रभाव डालती है। चंद्रमा के घटने-बढ़ने से कई बार लोगों पर सकारात्मक असर पड़ता है, तो वहीं दूसरी तरफ इसका बुरा असर भी पड़ता है। अमावस्या और पूर्णिमा में चंद्रमा की ऊर्जा का विशेष प्रभाव माना जाता है। ऐसे में अपने आप को बुरे प्रभाव से कैसे बचाएं, आइए जानते हैं।
जब चंद्रमा अमावस्या की ओर बढ़ता है, तो इस स्थिति को लाल किताब में चंद्रमा की सबसे कमजोर स्थिति माना जाता है। यानी अमावस्या वाले दिन चंद्रमा की ऊर्जा कमजोर रहती है। लाल किताब के अनुसार, अमावस्या के दिन व्यक्ति के मन में ज्यादा नकारात्मक विचार, चिंता और मानसिक अस्थिरता रहती है। साथ ही लोगों के मन में असमंजस की भावना जागती है, जिससे व्यक्ति किसी विषय में सही फैसला नहीं ले पाता। इसी वजह से माना जाता है कि अमावस्या के दिन शुभ कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए।
पूर्णिमा के दिन चांद रहता है मजबूत
लाल किताब के अनुसार, पूर्णिमा के दिन चांद की पूरी रोशनी होती है। जिसके प्रभाव से व्यक्ति के मन में उत्साह, भावनात्मक स्थिरता और पॉजिटिव वाइब्स आती हैं, जिससे व्यक्ति का अपने करीबियों से मिलने का मन करता है।
साथ ही व्यक्ति बड़े से बड़े मामले में फैसले लेने के लिए सक्षम महसूस करता है। अब सवाल उठता है कि मन को संतुलित करने के लिए किन उपायों को अपनाना चाहिए।

