KedarnathShivling : केदारनाथ का शिवलिंग त्रिकोण क्यों है? :- चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल से हो चुकी है, जहां हजारों भक्त केदारनाथ धाम की यात्रा करने जा रहे हैं। केदारनाथ धाम में भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है। इस बार 22 अप्रैल के दिन से धाम के कपाट खोल दिए गए। पौराणिक कथा के मुताबिक केदारनाथ धाम का जुड़ाव महाभारत के पांडवों से है। माना जाता है कि पांडवों ने ही केदारनाथ मंदिर की स्थापना करवाई थी।
केदारनाथ में पांडवों को मिली थी पाप से मुक्ति
धार्मिक मान्यता के अनुसार, केदारनाथ धाम के दर्शन करने से भक्तों के पाप मिट जाते हैं। इस मंदिर का शिवलिंग बाकी मंदिरों से बिल्कुल अलग है, जिसे लेकर कई धार्मिक जानकार दावा करते हैं कि यह शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था। ऐसे में सवाल उठता है कि मंदिर की पौराणिक कथा क्या है। साथ ही सवाल यह भी उठता है कि केदारनाथ मंदिर के शिवलिंग का रहस्य क्या है?
केदारनाथ धाम की पांडवों से जुड़ी क्या है कहानी ?
धार्मिक कथाओं के मुताबिक, पांडवों और कौरवों के बीच युद्ध खत्म हो चुका था, जिसमें पांडवों को जीत मिली थी। युधिष्ठिर और श्री कृष्ण के बीच बातचीत हो रही थी। उसी दौरान भगवान श्री कृष्ण ने कहा था कि पांडवों पर ब्रह्म दोष है क्योंकि उन्होंने अपने भाइयों का वध किया था। इसके बाद पांडवों ने पूछा कि इस पाप से कैसे मुक्ति पाई जाए। श्री कृष्ण ने कहा कि पापों से मुक्ति पानी है तो भगवान शिव की शरण में जाएं।
पांचों पांडव अपने पाप से मुक्ति पाने के लिए काशी गए, जहां जाने के बाद उन्हें पता चला कि भगवान शिव काशी छोड़कर चले गए थे। इसके बाद पांडव हिमालय गए, जहां पांडवों को देखकर भगवान शिव ने बैल का रूप धारण कर लिया और पशुओं के झुंड में छिप गए। इसी दौरान भीम ने बैलों के झुंड में शिव जी को पहचान लिया। इसके बाद भीम ने बैल की पीठ पकड़ ली। पांडवों की इस श्रद्धा को देखकर भगवान शिव प्रसन्न हो गए और उन्होंने पांडवों को पाप से मुक्त कर दिया।
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, जब भीम ने बैल को पकड़ लिया था, तब बैल का सिर धड़ से अलग हो गया। उसी धड़ में शिव जी का वास हो गया। बैल का धड़ त्रिकोण आकार का था, इसी वजह से केदारनाथ धाम का शिवलिंग त्रिकोण आकार का है। इसी शिवलिंग की पांडव मिलकर पूजा-अर्चना किया करते थे। कुछ समय बाद इसी जगह पर केदारनाथ धाम के नाम से पूरे विश्व में मशहूर हो गया।

