NewLabourLaw : सैलरी, PF, ग्रेच्युटी और छुट्टियों में बड़े बदलाव :- नोएडा में हाल ही में वर्कर्स के हंगामे के बाद नए लेबर कोड पर बहस फिर से गर्म हो गई है. केंद्र सरकार पहले ही इन नियमों को लागू करने की तैयारी कर चुकी है लेकिन फिलहाल ज्यादातर राज्य ट्रांजिशन मोड में हैं. यानी राज्य सरकारें अपने स्तर पर नोटिफाई करेंगी, तभी ये नियम पूरी तरह लागू होंगे. नए लेबर कोड लागू होने के बाद सैलरी स्ट्रक्चर, PF, ग्रेच्युटी, छुट्टियां, ओवरटाइम, वर्किंग घंटे और जॉब सिक्योरिटी जैसे कई पहलुओं में बदलाव होगा।
नया लेबर कोड क्या है?
सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर 4 नए लेबर कोड बनाए हैं. इनमें वेतन, इंडस्ट्रियल रिलेशन, सोशल सिक्योरिटी और वर्किंग कंडीशन से जुड़े नियम शामिल हैं. ये नियम केंद्र स्तर पर तैयार हैं लेकिन राज्यों की मंजूरी के बाद ही लागू होंगे.नए वेज कोड के तहत बेसिक सैलरी और DA मिलाकर कुल वेतन का कम से कम 50% होना जरूरी होगा. इससे कंपनियों को सैलरी स्ट्रक्चर बदलना पड़ेगा और कई अलाउंस कम हो सकते हैं।
इन-हैंड सैलरी पर असर
कई कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी थोड़ी कम हो सकती है क्योंकि बेसिक सैलरी बढ़ने से PF और ग्रेच्युटी की कटौती बढ़ जाएगी. हालांकि मंत्रालय का कहना है कि PF की कटौती 15,000 रुपये लिमिट तक रहेगी तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा.बेसिक सैलरी बढ़ने से PF और ग्रेच्युटी दोनों में योगदान बढ़ेगा. इससे रिटायरमेंट के समय मिलने वाली रकम ज्यादा होगी और लॉन्ग-टर्म सेविंग मजबूत बनेगी. अब फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी भी ग्रेच्युटी के हकदार होंगे. सिर्फ 1 साल लगातार काम करने पर ग्रेच्युटी मिलेगी, जबकि पहले इसके लिए 5 साल जरूरी थे।
काम के घंटे और ओवरटाइम
वर्किंग डे 8 घंटे और वीक 48 घंटे तय रहेगा. अगर कोई कंपनी 4 दिन का वर्किंग वीक लागू करती है तो एक दिन में 12 घंटे काम करना होगा. इसके बाद का काम ओवरटाइम माना जाएगा और उसका भुगतान दोगुना करना होगा.अब हर कर्मचारी को लिखित अपॉइंटमेंट लेटर देना अनिवार्य होगा. इसमें सैलरी ब्रेकअप, छुट्टियां और सोशल सिक्योरिटी से जुड़े अधिकार साफ लिखे होंगे. छुट्टियों के कैरी फॉरवर्ड और एनकैशमेंट के नियम भी स्पष्ट होंगे।
पेमेंट और सोशल सिक्योरिटी
नए नियमों के तहत रोजाना काम करने वालों को शिफ्ट खत्म होते ही पेमेंट मिलेगा. साप्ताहिक कर्मचारियों को छुट्टी से पहले और मंथली कर्मचारियों को अगले महीने की 7 तारीख तक पेमेंट करना होगा. नौकरी छोड़ने पर 2 दिन के भीतर पूरा भुगतान करना होगा. PF और ESIC की सुविधा ज्यादा कंपनियों में लागू होगी और कॉन्ट्रैक्ट व गिग वर्कर्स को भी सोशल सिक्योरिटी का फायदा मिलेगा.अब सरकार नेशनल फ्लोर वेज तय करेगी जिसे सभी राज्यों को मानना होगा. इससे कम सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को फायदा होगा. कंपनियों को हर साल फ्री हेल्थ चेकअप कराना होगा और बड़े संस्थानों में सेफ्टी कमेटी बनानी होगी।
नया लेबर कोड नौकरी के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है. PF और ग्रेच्युटी मजबूत होगी, सैलरी स्ट्रक्चर बदलेगा, छुट्टियों का हिसाब साफ होगा और ओवरटाइम के नियम तय होंगे. ऐसे में हर कर्मचारी के लिए जरूरी है कि वह अपनी सैलरी स्लिप और अपॉइंटमेंट लेटर ध्यान से पढ़े और इन बदलावों को समझे. सही जानकारी के साथ ये बदलाव भविष्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

