BabyBonding : क्या बच्चे के साथ एक ही बिस्तर पर सोना सुरक्षित :- भारतीय परिवारों में मां के साथ बच्चे का एक ही बिस्तर पर सोना बहुत आम बात है. इसे परंपरा, अपनापन और सुविधा से जोड़ा जाता है. रात में ब्रेस्ट फीड करना इससे आसान होता है और बच्चे के रोने पर तुरंत उसे शांत भी कराया जा सकता है. लेकिन मेडिकल रिसर्च के अनुसार अगर सावधानी न बरती जाए तो यह आदत बच्चों के लिए खतरनाक भी हो सकती है।
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एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमोशनल जुड़ाव के साथ-साथ सुरक्षा नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या बच्चे के साथ एक ही बिस्तर पर सोना सुरक्षित है और डॉक्टर इसे लेकर क्या फायदे और नुकसान बताते हैं।
ज्यादातर भारतीय घरों में अलग से बच्चों के कमरे कम ही देखने को मिलते हैं. बच्चा माता-पिता के साथ एक ही कमरे और बिस्तर पर सोता है. इसे बच्चे की देखभाल का प्रतीक माना जाता है.माना जाता है कि मां के पास सोने से बच्चे और मां के बीच बॉन्डिंग मजबूत होती है।
रात में ब्रेस्ट फीडिंग आसान होता है और बच्चे के रोने पर तुरंत ध्यान दिया जा सकता है. इससे दोनों की नींद का चक्र भी सेम हो सकता है. वहीं एक्सपर्ट्स के अनुसार इस तरह की परंपराएं जरूरी है, लेकिन उन्हें सुरक्षा मानकों के साथ अपनाना भी जरूरी है. आराम और इमोशन के साथ बच्चे की सुरक्षा सबसे पहले होनी चाहिए.वहीं एक्सपर्ट्स के अनुसार बच्चे और मां के एक ही बिस्तर पर सोने से जुड़ा सबसे बड़ा खतरा Sudden Infant Death Syndrome है. यह नींद के दौरान हेल्दी दिखने वाले बच्चे की अचानक और अज्ञात कारणों से मृत्यु को दर्शाता है।
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इसके अलावा अनजाने में माता-पिता का बच्चे पर पलट जाना, गद्दे और दीवार या हेडबोर्ड के बीच फंस जाना, मुलायम तकिए, रजाई या चादर से सांस रुकना ये सब खतरे बढ़ जाते हैं।
खासकर तब जब माता-पिता स्मोकिंग करते हों, शराब का सेवन किया हो या नींद की दवाइयां ली हों.डॉक्टर पूरी तरह से बच्चे और माता-पिता को अलग-अलग सोने की सलाह नहीं देते हैं, बल्कि सुरक्षित तरीके अपनाने पर जोर देते हैं. डॉक्टर बताते हैं कि सख्त और समतल गद्दे का इस्तेमाल करें, बच्चे के पास तकिया, खिलौने या भारी रजाई न रखें, बच्चे को हमेशा पीठ के बल सुलाएं और सोने की जगह साफ और अलग रखें।
इसके अलावा अगर माता-पिता में से कोई स्माेकिंग करता हो, शराब पी हो, सीडेटिव दवाइयां ली हों या ज्यादा थका हो तो एक ही बिस्तर पर सोना टालना चाहिए. इन स्थितियों में सतर्कता कम हो सकती है और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा एक्सपर्ट्स एक ही कमरे में लेकिन अलग बिस्तर पर बच्चे को सुलाने की सलाह देते हैं. इससे बच्चे और माता-पिता की नजदीकी भी बनी रहती है और बच्चे के लिए अलग सुरक्षित जगह भी मिलती है।

