Border2Review : रिलीज हुई बॉर्डर 2, जानिए कैसा है फिल्म का रिव्यू :- तुम जहां से भी घुसने की कोशिश करोगे… आसमान से, ज़मीन से या समंदर से… सामने एक हिंदुस्तानी फौजी खड़ा पाओगे!” जी हाँ… सनी देओल की गरजती आवाज़ एक बार फिर देशभक्ति की रगों में जोश भरने आ गई है। करीब 29 साल बाद, जेपी दत्ता की ऐतिहासिक फिल्म ‘बॉर्डर’ की विरासत को आगे बढ़ाती है
‘बॉर्डर 2’ जो सिर्फ जंग की कहानी नहीं, बल्कि बलिदान, दोस्ती और देश के लिए मर-मिटने के जज़्बे की दास्तान है। फिल्म की कहानी हमें ले जाती है।
बड़ी अपडेट एक क्लिक में ;- RamMandirAyodhya : राम नगरी अयोध्या से उठती एक ऐतिहासिक गूंज
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौर में… जहां लड़ाई सिर्फ लोंगेवाला तक सीमित नहीं थी, बल्कि जल, थल और वायु तीनों मोर्चों पर लड़ी जा रही थी। तीन दोस्त… जो 1961 में नेशनल वॉर एकेडमी में मिले,
और 1971 की जंग में देश के लिए अपनी बहादुरी साबित करते हैं। एक तरफ शादी के तुरंत बाद ड्यूटी पर बुलाए गए फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों, तो दूसरी ओर पहले बच्चे के जन्म का इंतज़ार कर रहे मेजर होशियार सिंह दहिया, और समंदर की लहरों के बीच फर्ज निभाने निकल पड़े लेफ्टिनेंट कमांडर महेंद्र रावत है।
इन सबके मार्गदर्शक हैं लेफ्टिनेंट कर्नल फतेह सिंह कलेर यानी… सनी देओल। एक ऐसा फौजी जिसने निजी जीवन में अपने जवान बेटे का बलिदान देखा है, लेकिन फिर भी देश की रक्षा में डटा हुआ है। यही किरदार फिल्म की आत्मा बनकर उभरता है। फिल्म उस दौर की सच्चाई दिखाती है जब भारतीय सेना का बड़ा हिस्सा पूर्वी पाकिस्तान में तैनात था, और पश्चिमी सीमा पर कम सैनिकों के साथ
दुश्मन का सामना करना था।
राजस्थान, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की साज़िशें… और सवाल सिर्फ एक—
कौन लौटेगा घर? और कौन अमर हो जाएगा इतिहास में?
निर्देशक अनुराग सिंह ने फिल्म में देशभक्ति के साथ-साथ इमोशन का भी पूरा ख्याल रखा है। फर्स्ट हाफकिरदारों की कहानी गढ़ता है, तो सेकंड हाफ
युद्ध के मैदान में रोमांच भर देता है।
टैंक, बंदूकें, हवाई हमले और नेवी ऑपरेशन— सब कुछ भव्य है। और गाना घर कब आओगे…” सीधे दिल को छू जाता है। हालांकि फिल्म का रनटाइम थोड़ा लंबा है, लेकिन कहानी आपको बांधे रखती है।
सनी देओल अपने सिग्नेचर अंदाज़ में पूरी फिल्म संभाल लेते हैं। वरुण धवनहरियाणवी लहजे और इमोशन से दिल जीतते हैं।
दिलजीत दोसांझ हवाई युद्ध के सीन में यादगार साबित होते हैं। और अहान शेट्टी इस फिल्म के ज़रिए अपने पिता सुनील शेट्टी को खूबसूरत ट्रिब्यूट देते नज़र आते हैं। महिला किरदारों ने भीकहानी को मजबूती दी है। अगर आप बॉर्डर’ की यादों में आज भी खो जाते हैं… अगर आपको वॉर फिल्में पसंद हैं… और अगर आप गणतंत्र दिवस पर देशभक्ति से लबरेज फिल्म देखना चाहते हैं… तो बॉर्डर 2’ आपके लिए एक परफेक्ट चॉइस है। देश के लिए जान देने वालों को सलाम करती एक फिल्म… यही है बॉर्डर 2।

