स्मार्ट देहरादून में पार्किंग “ढूंढते रह जाओगे ” : उत्तराखंड में साल दर साल पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है. पर्यटकों की संख्या बढ़ने से पहाड़ों पर ट्रैफिक का दबाव तो बढ़ ही रहा है, साथ ही पार्किंग की समस्या भी खड़ी होती जा रही है. इन हालात में पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की जाम की समस्या का सामना करना पड़ता है. पर्यटन सीजन में तो ये समस्या और भी गंभीर हो जाती है. यहीं कारण है कि अब सरकार सड़क चौड़ीकरण के साथ-साथ ही पार्किंग स्थलों के निर्माण पर भले ही जोर दे रही है.लेकिन क्या है ज़मीनी हकीकत इस रिपोर्ट में देखिये –
- बाजार में व्यापारियों के साथ ही ग्राहक सड़कों पर खड़ा कर रहे वाहन.
- पहले से ही सड़कों की चौड़ाई मानकों से है कई कम.
- सड़क पर वाहन पार्क किए जाने पर लग रहा जाम.
- प्रमुख कॉम्प्लेक्सों के पास नहीं है पार्किंग की सुविधाएं.
- कई प्रतिष्ठिानों के पास बेसमेंट है, लेकिन उसका हो रहा दूसरा यूज.
- स्टील्ड और ओपन पार्किंग के भी बुरे हाल.
पार्किंग के लिए बनी कई योजनाएं, धरातल पर एक भी नहीं उतरी.राजधानी दून में पार्किंग की दर्जनों योजनाएं बनीं, लेकिन धरातल पर एक भी नहीं उतरी। कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स से लेकर होटलों तक पार्किंग अनिवार्य की गई, लेकिन नियम लगातार तार पर रखे गए। पार्किंग की अलग से भी योजनाएं बनाई गई, यह भी कागजों में ही धूल फांक रही है। वर्षों बाद भी पार्किंग के प्रोजेक्ट अमलीजामा नहीं पहन सकी। शहर में हालात इतने खराब हो गए हैं कि लोग बाजार में पार्किंग ढूंढते -ढूंढते थक जाते हैं। पुरानी तहसील परिसर बिल्डिंग को तोड़कर पार्किंग की योजना भी अधर में लटकी है। इंदिरा मार्केट कॉम्प्लेक्स और ग्रीन बिल्डिंग पार्किंग का भी यही हाल है।
दून के तहसील परिसर में सबसे बड़ी और शहर की पहली बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण भी वर्षों बाद शुरू नहीं हो पाया है। कभी जमीन तो कभी बिल्डिंग हैंडओवर होने से योजना आगे बढ़ती गई। इस पार्किंग का निर्माण एमडीडीए की ओर से किया जा रहा है, जिस पर 147 करोड़ रुपए खर्च होंगे। खास बात यह है कि 18 महीने में कंप्लीट होने बनने वाली यह योजना तीन साल बाद भी काम तक शुरू नहीं हो पाया, जिसका खामियाजा आम पब्लिक को भुगतना पड़ रहा है।
पुरानी तहसील को तोड़कर यहां 7 मंजिला पार्किंग बनाई जानी है। पार्किंग के अलावा इसमें सबसे ऊपर तसहील कार्यालय भी बनाया जाना था। इस बिल्डिंग के बनने से तहसील एरिया में पार्किंग की बड़ी समस्या समाप्त होने का दावा किया गया, लेकिन अभी तक इस दिशा में किए गए प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। स्मार्ट सिटी की ओर से भी घंटाघर, आईएसबीटी, विभिन्न इलाकों में ऑन लाइन पार्किंग शुरू की गई, लेकिन यह योजना भी परवान नहीं चढ़ पाई। मॉनिटरिंग के अभा में बाद में योजना ही बंद हो गई। अब इस चुनौती से कैसे निपटेगा एमडीडीए , यही सवाल खोजी नारद ने पूछा उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी से तो सुनिए उनका क्या कहना है –
दून में पार्किंग को लेकर इंदिरा मार्केट मल्टी स्टोरी कॉम्प्लेक्स और ग्रीन बिल्डिंग में भी डबल बेसमेंट की योजना है। यहां पर हजारों वाहनों के पार्किंग की सुविधा मिलनी है, लेकिन इन प्रोजेक्ट्स का भी यही हाल है। ऋषिकेश में भी नगर निगम कार्यालय में बहुमंजिला पार्किंग प्रस्तावित है। यहां भी अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया।पार्किंग की कमी के चलते लोग सड़कों पर वाहन पार्क करने को मजबूर हैं। इससे लगातार जाम की स्थित बनी हुई है। सड़क चौड़ीकरण के बाद भी शहर में ट्रैफिक के पहिए जाम हो रहे हैं। शहर की किसी भी रोड पर ट्रैफिक फ्री नहीं हो पा रहा है। इसकी मुख्य वजह पार्किंग की कमी है। फिलहाल तो आप सिर्फ इंतज़ार कीजिये कि स्मार्ट देहरादून को कब मिलेगी पार्किंग की समस्या ने छुटकारा।

