क्या बीते दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिल्ली दौरे का यही मतलब था ?
जी हां अगर अफवाहों पर तनिक गंभीरता के साथ विचार करें तो कयास लगाए जा रहे हैं कि उत्तराखंड कांग्रेस के मौजूदा विधायकों में से आधे से ज्यादा विधायक खेल कर सकते हैं।
अगर कानाफूसी और सुगबुगाहट को गंभीरता से लिया जाए तो हालात भी कुछ ऐसे ही उलटफेर की ओर इशारा कर रहे हैं।
बीते लगभग 1 साल में उत्तराखंड कांग्रेस के कई विधायक बेहद निजता के साथ जहां धामी सरकार के प्रति सहानुभूति और मौन समर्थन जता रहे थे , वहीं कुछ विधायक पार्टी में ही बगावती तेवर अपनाये हुए हैं।
इन नामों में दो से तीन नाम ऐसे हैं जो अगर अफवाहों के आधार पर सच माने जाएं तो प्रदेश की राजनीति में बहुत बड़ा चौंकाने वाला सच साबित हो सकता है।
दरअसल कांग्रेस मुख्यालय हो या भाजपा का मुख्यालय दोनों ही जगह जब आप प्रवक्ताओं और पदाधिकारियों के कक्ष में बैठकर उनकी बातें सुनेंगे तो इन कयासों को बल मिलता नजर आएगा।
जहां आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर दोनों ही तरफ के नेता अपनी-अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं तो वही कैबिनेट विस्तार में भी देरी सामने दिख रही है।
ऐसे में बीते कुछ महीने में प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री की कई बार की मुलाकात , पार्टी अध्यक्ष और गृहमंत्री के साथ-साथ बड़े संगठन के अधिकारियों की बैठकें देहरादून से दिल्ली तक आयोजित की गई और अंदर खाने कहा जा रहा है कि बेहद गोपनीयता के साथ कांग्रेस के बेहद मजबूत और बड़े चेहरों को भाजपा में शामिल करने की पटकथा लिखी जा रही है।
जिसकी अगुवाई खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कर रहे हैं। हालांकि यह संभावना और सूत्रों के आधार पर कहीं जा रही बात है।
लेकिन अगर ऐसा होता है तो उत्तराखंड की कमजोर विपक्ष कांग्रेस को बहुत बड़ा झटका लोकसभा चुनाव से पहले लग सकता है।
कांग्रेस के दिग्गज विधायकों की भाजपा में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है उनके नाम दबी जुबान दोनों ही खेलों में आजकल काफी चर्चाओं में है और बीते कुछ दिनों से जहां कांग्रेस में प्रभारी और अध्यक्ष को लेकर तमाम तरह के मोर्चे पर ये विधायक अपना दमखम दिखा रहे हैं।
वही हरीश रावत हो यशपाल आर्य हो या करण माहरा उनके प्रति भी इनके आक्रामक रवैया में कोई कमी नहीं रही है ।
हरिद्वार और पहाड़ के साथ-साथ देहरादून के इर्द-गिर्द की विधानसभा से जुड़े यह विधायक पूरी तरह से ना सही लेकिन पार्टी नेताओं के रवैए से नाराज होकर किसी भी दिन भाजपा ज्वाइन कर ले तो इसमें कोई हैरानी नहीं होगी।
दरअसल हरिद्वार ,पौड़ी और नैनीताल लोकसभा सीट पर दोनों ही पार्टियों के नेताओं के उम्मीदवारों की लंबी फौज है।
ऐसे में कांग्रेस के कुछ विधायक ऐसे हैं जो लोकसभा का सपना लंबे समय से पाल रहे हैं और अब 2024 में इसे पूरा करने के लिए अपना यह सियासी दांव भी चल देना चाहते हैं।
लेकिन अगर ऐसा होता है तो जहां कांग्रेस विपक्ष में बेहद कमजोर हो जाएगी वहीं लोकसभा चुनाव से पहले उसके मनोबल में भी गिरावट आएगी इसके उलट अगर बात करे भाजपा की तो पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में विधानसभा के साथ साथ मौजूदा 5 लोकसभा सीटों पर उनकी पकड़ मजबूत है।
ऐसे में अगर कांग्रेस के बड़े चेहरे कमल के साथ खड़े हो जाएंगे तो हाथ का साथ कमजोर हो जाएगा।
इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा और इनाम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को तो इंतजार कीजिए कयासों और अफवाहों को हकीकत में तब्दील होने का, क्योंकि ये सियासत है जिसमें ना कोई दोस्त है और ना कोई दुश्मन , मुद्दा तो सिर्फ कुर्सी का है।

