रक्षा समझौते हो या आई.टी. पेशेवरों और नए अमरीकी वाणिज्य दूतावासों के लिए वीजा में छूट, प्रौद्योगिकी सहयोग में एक नए युग का आरम्भ हो या बड़े निवेश और नौकरी के अवसर, स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन के लिए प्रयास हो या एम.क्यू-9बी सीगाॢजयन ड्रोन खरीदना।
भारतीय विमानों के लिए भारत में जैट इंजन बनाना हो या भारत में सैमीकंडक्टर असैंबली और परीक्षण सुविधाओं का कार्य, प्रधानमंत्री मोदी जी की इस यात्रा ने एक नए इतिहास की रचना की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदैव भारत की विदेश नीति को तैयार करने और उसे कार्यान्वित करने के लिए सराहे जाते हैं।
उन्होंने अपने प्रयासों से भारत को विश्व मंच पर वैश्विक नेताओं के बीच स्थापित किया है। उन्होंने जिस प्रकार भारत को एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित किया है, इसकी कल्पना भी पिछले 7 दशकों में कोई प्रधानमंत्री नहीं कर सका था।
पी.एम. मोदी और अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का 58 पैराग्राफ का संयुक्त वक्तव्य संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने और एक नए भविष्य की रूपरेखा तैयार करने की स्व-घोषणा है।
रक्षा समझौते,भारत तथा अमरीका के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में से एक है, दोनों देश पहले से ही कई सांझा समझौतों में लगे हुए हैं।
भारत-संयुक्त राज्य अमरीका में रक्षा त्वरण पारिस्थितिकी तंत्र के लांच से दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्रों में सहयोग और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
जनरल इलैक्ट्रिक ने भारतीय वायु सेना के लिए लड़ाकू जैट इंजन बनाने के लिए भारत के हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड के साथ एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की है।
यह अपनी तरह की पहली पहल है जिसके तहत भारत में एफ 414 इंजन बनाने के लिए-अधिक अमरीकी जैट इंजन प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की सुविधा प्रदान करेगी।
जी.ई. के मुताबिक, इन इंजनों का इस्तेमाल तेजस लड़ाकू विमानों को शक्ति प्रदान करने के लिए किया जाएगा।
अमरीका ने पहले कभी किसी देश के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का ऐसा रणनीतिक समझौता नहीं किया है।
भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसके साथ अमरीका यह समझौता कर रहा है। भारतीय रक्षा में एक और महत्वपूर्ण तत्व जनरल एटॉमिक्स से सशस्त्र एमक्यू-9बी सीगार्जियन यू.ए.वी. की खरीद होगी, क्योंकि इस से देश की खुफिया, निगरानी और निरीक्षण क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा भारत का इरादा जनरल एटॉमिक्स द्वारा बनाए गए 31 ड्रोन खरीदने का है।
जिनकी कीमत 3 बिलियन डॉलर से कुछ अधिक है इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन्हें भारत में असैंबल किया जाएगा।
इसके अलावा, नया मास्टर शिप रिपेयर एग्रीमैंट (एम.एस.आर.ए.) मध्य-यात्रा वाले अमरीकी नौसेना के जहाजों को भारतीय शिपयार्ड में सेवा और मरम्मत से गुजरने की अनुमति देगा।
आई.टी. पेशेवरों और नए अमरीकी वाणिज्य दूतावासों के लिए वीजा में छूट : प्रधानमंत्री मोदी तथा अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के बीच द्विपक्षीय बैठक के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने प्रवासी भारतीयों को एक बड़ी राहत दी।
उन्होंने एक महत्वपूर्ण घोषणा की जिस के अंतर्गत अब पेशेवर भारतीयों को विदेश यात्रा किए बिना भी अपने कार्य वीजा को नवीनीकृत करने का अवसर प्रदान किया।
अब भारतीय पेशेवर विदेश यात्रा किए बिना अपने कार्य वीजा को नवीनीकृत कर सकते हैं।
वीजा के घरेलू नवीनीकरण पर निर्णय लेने के लिए एक पायलट लांच किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त भारतीय नागरिकों सहित, 2024 में एच -1बी और एल वीजा धारकों के विस्तारित पूल के लिए इसे लागू करने और अन्य श्रेणियों को शामिल करने के लिए कार्यक्रम को व्यापक रूप दिया जाएगा।
इसके अलावा अमरीका ने भारत में बेंगलुरु और अहमदाबाद शहरों में दो नए वाणिज्य दूतावास खोलने की भी दिलचस्पी दिखाई है।
प्रौद्योगिकी सहयोग में एक नया युग : दोनों देश पहले से ही क्रिटिकल एंड एमर्जिंग टैक्नोलॉजी इनिशिएटिव जैसे कई महत्वपूर्ण समझौतों में लगे हुए हैं।
जिस पर इस साल जनवरी में हस्ताक्षर किए गए थे, नए समझौतों का उद्देश्य भारत और अमरीका के बीच तकनीकी सांझेदारी के एक नए पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना है।
बड़े निवेश और नौकरी के अवसर : एमेजॉन ने अगले 7 वर्षों में भारत में अतिरिक्त 15 बिलियन डालर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है जिससे देश में कंपनी का कुल निवेश 26 बिलियन डालर हो जाएगा, सर्च इंजन दिग्गज गूगल ने अपना वैश्विक फिनटेक ऑपरेशन सैंटर स्थापित करने की प्रतिबद्धता जताई है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता : भारत और संयुक्त राज्य अमरीका ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम प्रौद्योगिकी के संयुक्त विकास और व्यवसायीकरण के लिए 2 मिलियन डालर के अनुदान के साथ यू.एस.-भारत विज्ञान और प्रौद्यौगिकी एंडोमैंट फंड की स्थापना के लिए प्रत्यारोपण व्यवस्था पर हस्ताक्षर किए हैं।

