प्रतिनिधी मंडल में उनके साथ मनमोहन सिंह नेगी, उपाध्यक्ष राज्य किसान आयोग उत्तराखण्ड, अशोक गिरी, कृषि विभाग उत्तराखण्ड, जितेन्द्र एवं सचिन चौधरी, सदस्य राज्य किसान आयोग उत्तराखण्ड सम्मिलित थे।
प्रतिनिधी मंडल ने संग्राहलय के अवलोकन के दौरान विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नवीनतम तकनीकियों की जानकारी हासिल की और इन्हें अपने राज्य में अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के लिये कृषि वैज्ञानिकों का अह्वान किया।
महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलपति डॉ. अजीत कुमार कर्नाटक ने प्रतिनिधी मंडल को संग्राहलय का अवलोकन कराते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने जल एवं मृदा संरक्षण तकनीकों पर विशिष्ट कार्य किया है।
उन्होने यह भी बताया कि एम पी यू ए टी ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य किया है और दक्षिणी राजस्थान के लगभग दस हजार से भी अधिक आदिवासी किसानों के घरों में उन्नत चूल्हे ”उदय राज” लगवाये है जो न केवल प्रदूण रहित चूल्हे है बल्कि इनकी ऊर्जा दक्षता भी पारम्परिक चूल्हों की तुलना में 5 गुणा अधिक है।
उत्तराखंड किसान आयोग के अध्यक्ष राकेश राजपूत ने चर्चा के दौरान कृषि विविधीकरण पर अधिक बल देते हुए अधिक से अधिक किसानों को इसके लिए प्ररित करने पर बल दिया।
उन्होनें इस संग्राहालय को एक उत्कृष्ट श्रेणी का अदभुत संग्रहालय बताया।
अवलोकन के दौरान डॉ आर. ए. कौशिक, निदेशक प्रसार शिक्षा, डॉ. अरविन्द वर्मा, निदेशक अनुसंधान निदेशालय, डॉ पी. के. सिंह, अधिष्ठाता, सी.टी.ए.ई कॉलेज, डॉ. बी. के. शर्मा, अधिष्ठाता मत्स्यकी महाविद्यालय, उदयपुर आदि भी उपस्थित थे।
उन्होने मक्का की उन्नत किस्मों के बारे में प्रतितिनधि मण्डल के प्रश्नों के उत्तर देते हुये बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किस्में मक्का की तुलना में 25 से 35 प्रतिशत अधिक उत्पादन देती है।
विश्वविद्यालय इन उन्नत किस्मों के बीज अधिक से अधिक किसानो को उपलब्ध कराने के लिए पूरजोर प्रयास कर रहा है।
किसान आयोग के प्रतिनिधी मंडल ने कृषि संग्रहालय को देख कर इच्छा जाहिर की कि उत्तराखंड से भी किसानों को इस संग्रहालय के अवलोकन के लिए भेजेंगे।
संग्राहलय के नोडल अधिकारी डॉ राजीव बैराठी, आचार्य, प्रसार शिक्षा निदेालय, उदयपुर ने बताया कि यह कृषि संग्रहालय अपने आप में अनुठा है।
जिसमें तकरीबन 34 प्रकार की नवीनतम कृषि पद्धितियों को एक ही जगह प्रदर्शित किया गया है।
हर वर्ष लगभग 1500 से 2000 किसान, छात्र एवं छात्राएं संग्राहलय का भ्रमण कर नवीन कृषि तकनीकियों से लाभान्वित होते है।

