डर के मारे लोग घरों से बाहर निकल आए, और बागेश्वर में भूकंप सोमवार सुबह 4:49 मिनट पर आया। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 2.5 थी।
हालांकि भूकंप से अभी तक किसी जान माल के नुकसान की खबर नहीं है। लेकिन आपको बता दें कि 13 जनवरी की रात भी उत्तरकाशी में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।
धरती हिलते ही लोग बुरी तरह डर गए और कड़ाके की ठंड के बावजूद घरों से बाहर निकल आए थे। कई लोगों ने तो डरकर पूरी रात घर के बाहर ही बिताई थी।
पिछले महीने भी उत्तरकाशी में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उस वक्त भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.1 थी। उत्तराखंड आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है।
यहां लंबे वक्त से भूकंप की घटनाएं हो रही हैं।
राज्य में पूर्व में आए बड़ी तीव्रता के भूकंप की बात करें तो 1999 में चमोली में आए भूकंप का मैग्नीट्यूड 6.8, 1991 में उत्तरकाशी में 6.6 और 1980 में धारचूला में 6.1 मैग्नीट्यूड के भूकंप आ चुके हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में उत्तराखंड में 6 से 7 तीव्रता तक का भूकंप आ सकता है, और ये पांच से दस साल के भीतर हो सकता है।

