16 अप्रैल की रात स्वांग रचेंगी महिलाएं : राजस्थान के दूसरे बड़े जिले जोधपुर को प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में इसलिए भी जाना जाता है क्योंकि यहां के पर्व और त्योहार अपने आप में इसकी मिसाल है। त्योहारों की कड़ी में 16 अप्रैल को भीतरी शहर में बेंतमार गणगौर का मेला होगा। 16 अप्रैल की रात भीतरी शहर में स्त्रियों का राज रहेगा। इस प्राचीन परम्परा का उत्साह के साथ आज भी निवर्हन किया जाता है।
16 अप्रैल की रात महिलाएं स्वांग रचकर शहर की सड़कों पर राज करेंगी, जिसे धींगा गंवर या बैंतमार गणगौर के नाम से जाना जाता है। पूरे राष्ट्र भर में जोधपुर ही एक ऐसा शहर है जहां एक ऐसा अनोखा उत्सव मनाया जाता है जिसमें महिलाएं मर्दों की पिटाई करती हैं। राजस्थान के जोधपुर में मनाए जाने वाले इस उत्सव का नाम है धींगा गवर। इस उत्सव को ‘बेंतमार गणगौर’ के रूप में भी जाना जाता है।
बताया जाता है कि पुराने समय में भाभी अपने देवर और अन्य कुंवारे युवकों को प्यार से छड़ी मारकर बताती थीं कि यह कुंवारा है और संबंध की बात चल रही है। ऐसे में साथ वाली महिलाएं भी प्यार से बेंत मारकर कहती थीं-बात पक्की हो जाएगी और अब जल्द विवाह भी हो जाएगी।
बेंत खाने का आनंद लेते हैं पुरुष
बेंतमार के इस मेले में जब स्त्री स्वांग रचकर सड़क पर निकलती हैं तो उनके सामने जो भी पुरुष आता है वे उन्हें पीटती हैं। स्त्रियों की बेंत के आगे हर पुरुष भागता हुआ नजर आता है। इस मेले की सबसे खूबसूरत बात यह है कि कोई भी पुरुष स्त्रियों की बात का बुरा नहीं मानता फिर चाहे वह जान पहचान वाला हो या अनजान हो।
4 किलो से अधिक सोने से सजाई जाती गणगौर
शहर में जगह-जगह स्थापित होने वाली गवर को विशेष रूप से सजाया जाता है। बात सुनारों के मोहल्ले में लगाई गई गवर की करें, तो यहां गवर को 4 किलो से अधिक सोने से सजाया जाता है। इस सोने की मूल्य 1 करोड़ से अधिक होती है। शहर में कई स्थान गवर स्थापित की जाती है जिसे इसी तरह सोने से सजाया जाता है।

