KeralaToKeralam : केरल” राज्य का नाम बदलकर “केरलम” क्यों? :- इतिहास की झलक, संस्कृति की पहचान… अब अपने नाम में भी दिखेगी हमारी अस्मिता!”नमस्कार, आप देख रहे हैं खोजी नारद आज हम आपको बता रहे हैं दक्षिण भारत के खूबसूरत राज्य केरल के नाम बदलने की बड़ी खबर।
केंद्र सरकार ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की मंजूरी दे दी है। आइए जानें इसके पीछे की कहानी, इतिहास और भविष्य में इसके क्या मायने हैं।केरल का नाम केवल एक भौगोलिक पहचान नहीं है। इसे लेकर कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कहानियां जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है कि ‘केरा’ शब्द का अर्थ नारियल के पेड़ से जुड़ा है, और ‘आलम’ का मतलब भूमि या क्षेत्र से है। इस तरह ‘केरल’ का मतलब नारियल के पेड़ों वाली भूमि माना जाता है।
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इतिहास के पन्नों में देखें तो केरल का नाम सबसे पहले अशोक के शिलालेखों में ‘केरलपुत्र’ के रूप में मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान परशुराम ने समुद्र से भूमि निकालकर इसे आबाद किया, और इसी भूमि को बाद में केरल कहा गया।
इस बदलाव का उद्देश्य केवल नाम बदलना नहीं है, बल्कि यह राज्य की मूल मलयालम भाषा, सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक गौरव को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
केरल राज्य का नाम बदलने की कवायद पिछले कई सालों से चल रही थी। अब केंद्रीय कैबिनेट ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस बदलाव का मूल उद्देश्य राज्य की मूल मलयालम भाषा और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देना है।
केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को प्रस्ताव पारित किया था कि राज्य का नाम मलयालम में ‘केरलम’ होना चाहिए।केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद अब राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत इसे राज्य विधान सभा को भेजेंगे।
विधान सभा की राय प्राप्त होने के बाद संसद में केरलम (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’पेश किया जाएगा। इस विधेयक के पारित होने के बाद ही नाम आधिकारिक रूप से बदल जाएगा।
यह कदम केवल नाम परिवर्तन तक सीमित नहीं है। यह राज्य की सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को मजबूती देने, स्थानीय भाषा को प्रोत्साहित करने और इतिहास से जुड़े गौरव को पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जल्द ही हम अपने टीवी स्क्रीन और मैप पर केरल नहीं बल्कि केरलम देखेंगे। यह बदलाव सिर्फ शब्दों का नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, इतिहास और अस्मिता का सम्मान है“केरलम – एक नया नाम, एक नई पहचान!”

