ShankhMysteries : महादेव शिव पूजा में क्यों नहीं बजाते शंख ? :- शिव इस संसार में संहार करने वाले देवता के रूप में जाने जाते हैं. वो कैलाश पर्वत और श्मशान में रहते हैं. शिव जी की पूजा बड़ी ही सरल है. कहा जाता है कि महादेव मात्र एक लोटा जल चढ़ाने भर से प्रसन्न हो जाते हैं. महादेव जिस पर प्रसन्न हो जाएं उसका घर धन-धान्य से भर जाता है. महादेव के भक्त का काल भी कुछ बिगाड़ नहीं पाता. सावन और महाशिवरात्रि पर भगवान का विशेष जलाभिषेक किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि महादेव की पूजा में शंख वर्जित है? इसके पीछे धार्मिक, पौराणिक और अध्यात्मिक आधार हैं।
शंख की ध्वनि बहुत पावन मानी जाती है. इसको भगवान विष्णु के प्रमुख शस्त्रों में से एक माना जाता है. पूजा-पाठ के दौरान शंख बजाया जाता है, लेकिन शिव पूजन में शंख बजाना वर्जित होता है. पौराणिक कथा के अनुसार, शंख का संबंध एक असुर के शरीर से है, जिसे भगवान विष्णु के हाथों पराजय मिली थी. यही वजह है कि कुछ ग्रंथों में शंख को “मृतज” अर्थात मृत शरीर से उत्पन्न माना गया है. शिव पूजा में शंख से जल अर्पित करना इसी आधार पर उचित नहीं माना जाता।
शंख भगवान विष्णु को प्रिय है और इसका प्रमुख संबंध वैष्णव परंपरा बताया जाता है. वहीं शिव जी की पूजा-अराधना ध्यान, मौन, तपस्या की जाती है. शिव पूजा में शांति और सरलता को अधिक महत्व दिया गया है. शंख की ध्वनि उत्सव, विजय और मंगल का प्रतीक बताई जाती है. इसके विपरीत शिव जी योग, समाधि और वैराग्य के देवता माने जाते हैं।
शिव की मौन साधना होती है अधिक फलदायी
शिव जी की पूजा में शांत भाव, ध्यान और एकाग्रता का विशेष महत्व होता है. शिवलिंग पर सामान्य पात्र से जल, दूध या पंचामृत अर्पित करने की परंपरा का प्रचलन अधिक है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव पूजा में शोरगुल करना बहुत फलदायी नहीं होता. इसके विपरीत की शिव की मौन साधना का फल बहुत अधिक प्राप्त हो जाता है।

