VastuShastraTips : शाम के समय दरवाजे पर बैठना अशुभ क्यों ? :- भारतीय संस्कृति में घर और उसके हर हिस्से का अपना विशेष महत्व व पवित्रता होती है. घर के मुख्य दरवाजे को सिंहद्वार कहा जाता है. ये द्वार न केवल प्रवेश द्वार है बल्कि घर की ऊर्जा का केंद्र भी है. हालांकि, कई घरों में खासकर गांवों और शहरों में शाम के समय दरवाजे के सामने या बरामदे में बैठने की प्रथा है. यह प्रथा शुभ है या अशुभ, इसी सवाल पर जानते हैं विषय विशेषज्ञों की क्या राय है।
ज्योतिषाचार्य ने बताया की लोग अक्सर सूर्यास्त के समय, शाम को अपने घरों के सामने बैठते हैं. इसका मुख्य कारण मन की शांति पाना, सड़क पर आने-जाने वाले लोगों को देखना या पड़ोसियों से बातचीत करना होता है. हालांकि, इस समय सांसारिक विषयों पर चर्चा करना अधिक आम है, बजाय किसी देवी-देवता का नाम जपने या आध्यात्मिक चिंतन करने के।
घर का मुख्य द्वार या शेर का द्वार अत्यंत पवित्र माना जाता है. इसे घर का शक्ति केंद्र कहना गलत नहीं होगा. इस द्वार में सकारात्मक ऊर्जाओं को आकर्षित करने और उन्हें घर में प्रवेश कराने की क्षमता होती है. इस द्वार को स्थापित करते समय, इसके नीचे सोना, चांदी, पुराने सिक्के या परिवार की कुछ पवित्र वस्तुएं रखने की परंपरा है. इससे द्वार को और भी दिव्य शक्ति प्राप्त होती है।
सिंह द्वार पर सुबह के ब्राह्मी मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त और विशेष रूप से शाम के गोदोली मुहूर्त के दौरान अपार शक्ति होती है. ऐसा माना जाता है कि महालक्ष्मी इसी समय घर में प्रवेश करती हैं. घर की सीमा और प्रवेश द्वार होने के कारण, कोई भी शुभ ऊर्जा सबसे पहले इसी द्वार से प्रवेश करती है इसलिए इस द्वार को हर समय साफ और पवित्र रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है.शास्त्रों में कहा गया है कि ऐसे पवित्र स्थान पर बैठना शुभ नहीं होता, जहां महालक्ष्मी संध्याकाल में प्रवेश करती है।
नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रवेश
ऐसा माना जाता है कि शाम के समय नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रवाह बढ़ जाता है. घर के सामने बैठा व्यक्ति इन ऊर्जाओं के लिए द्वारपाल का काम कर सकता है, जिससे वे आसानी से घर में प्रवेश कर सकती हैं।
अनावश्यक बातें और तनाव
दरवाजे के सामने बैठे-बैठे कई लोग पड़ोसियों, राहगीरों, अपने वैवाहिक जीवन, बच्चों, करियर और अन्य कई चीजों के बारे में अत्यधिक बातें करते हैं. ऐसी गपशप और अनावश्यक बातें घर में नकारात्मक ऊर्जा लाती हैं और परिवार के सदस्यों में तनाव पैदा करती हैं. इससे घर की शांति और खुशहाली भंग होती है।
महालक्ष्मी के प्रवेश में बाधा
यदि कोई व्यक्ति महालक्ष्मी के प्रवेश द्वार पर बैठा हो, तो इससे लक्ष्मी के प्रवेश में बाधा उत्पन्न हो सकती है. साथ ही, अशुभ बातें भी लक्ष्मी जी को भाती नहीं हैं।
घर के मुख्य दरवाजे को लेकर पौराणिक कथा
विष्णु पुराण में हिरण्यकशिपु के वध की कथा भी सिंह द्वार के महत्व को उजागर करती है. नरसिंह हिरण्यकशिपु को घर की दहलीज पर रखकर उसका वध करते हैं. यह दहलीज की शक्ति और महत्व को दर्शाता है. ऐसे पवित्र स्थान पर अनावश्यक रूप से बैठना और नकारात्मक गतिविधियों में लिप्त होना उचित नहीं है इसलिए शाम के समय दरवाजे के सामने बैठना शुभ नहीं माना जाता. चाहे परिवार का कोई सदस्य हो या कोई अजनबी, इस पवित्र स्थान पर बैठने से घर की शांति भंग होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश बाधित होता है।

