Mother’sDay :मई के दूसरे रविवार को ही क्यों मनाते है ? :- हमारे देश भारत ही नहीं सभी देशों में एक रिश्ता बेहद खूबसूरत होता है और वो है मां का , वो माँ जो निस्वार्थ अपना प्यार लुटाती है और बच्चों की खुशी में खुश होती है और दुख में दुखी। वैसे तो मां के प्रति आभार जताने के लिए कोई एक दिन काफी नहीं है, लेकिन दुनिया भर में मई का दूसरा रविवार ‘मदर्स डे’ के रूप में मनाया जाता है जो माताओं को समर्पित किया गया है।
क्या आपने कभी सोचा है कि इस दिन की शुरुआत कैसे हुई? या फिर क्यों हर साल मई के दूसरे रविवार को ही कैलेंडर में यह खास तारीख चुनी जाती है? इस दिन के पीछे केवल उपहार और फूल ही नहीं, बल्कि एक बेटी का अपनी मां के प्रति वो असीम प्रेम और एक लंबा संघर्ष छिपा है, जिसने अमेरिका से शुरू होकर पूरी दुनिया को ममता के इस उत्सव में सराबोर कर दिया। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
मदर्स डे की शुरुआत का श्रेय अमेरिका की अन्ना जार्विस को जाता है। अन्ना अपनी मां एन रीव्स जार्विस से बेहद प्यार करती थीं। उनकी मां की इच्छा थी कि समाज में माताओं के योगदान को सम्मान देने के लिए एक विशेष दिन होना चाहिए।
1905 में जब उनकी मां का निधन हुआ, तो अन्ना ने उनकी इस इच्छा को अपना जीवन का उद्देश्य बना लिया। उन्होंने एक लंबा अभियान चलाया और आखिरकार 1908 में पहली बार आधिकारिक तौर पर एक चर्च में मदर्स डे का आयोजन किया गया।
अब सवाल ये उठता है कि मदर्स डे के लिए मई का दूसरा रविवार ही क्यों चुना गया, कोई एक निश्चित तारीख क्यों नहीं चुनी गई? इतिहासकारों के अनुसार, अन्ना जार्विस की मां का निधन मई के महीने में हुआ था। अपनी मां की याद में उन्होंने मई के दूसरे रविवार को स्मारक सभा का आयोजन किया था। अन्ना के निरंतर प्रयासों के बाद, 1914 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने एक कानून पारित किया, जिसमें आधिकारिक तौर पर घोषणा की गई कि हर साल मई का दूसरा रविवार ‘मदर्स डे’ के रूप में मनाया जाएगा।

