MRIvCTScan : MRI और CT Scan क्यों कराते हैं डॉक्टर्स ? जानिए अंतर् :- आजकल हेल्दी दिखने वाले इंसान का भी कोई भरोसा नहीं है. कभी भी कुछ भी हो सकता है और शरीर के अंदरूनी हिस्से में भी कई तरह की बीमारियां पनप सकती हैं. इसका पता काफी ध्यान और परेशानियों के बाद लगता है, क्योंकि लोगों को ऊपरी हिस्से में कुछ खास लक्षण दिखाई नहीं देते हैं. हालांकि, कई बार लगातार एक ही परेशानी बताने वाले मरीजों को एमआरआई कराने की सलाह देते हैं और दवाई देने के बाद भी उनकी ये समस्या दूर नहीं होती है. इसलिए यह जानना जरूरी है कि आखिर एमआरआई स्कैन किन बीमारियों की तलाश में काम आता है।
MRI Scan क्या होता है?
एमआरआई एक ऐसा मेडिकल टेस्ट है, जिसमें मरीज को एक मशीन के अंदर लिटाया जाता है. मशीन शरीर के अलग-अलग हिस्सों की तस्वीरें तैयार करती है. डॉक्टर इन तस्वीरों की मदद से शरीर के अंदर मौजूद अंगों, मांसपेशियों, नसों, हड्डियों और सॉफ्ट टिश्यू में होने वाले बदलावों को देख सकते हैं. कुल मिलाकर शरीर के किसी खास हिस्से जैसे दिमाग, रीढ़ की हड्डी, घुटने, कंधे, पेट या पेल्विस का एमआरआई किया जा सकता है।
दिमाग से जुड़ी बीमारी का पता लगाना- दिमाग से जुड़ी बीमारी का पता लगाने के लिए भी एमआरआई की जाती है. इसका इस्तेमाल ब्रेन ट्यूमर, स्ट्रोक, मल्टीपल स्केलेरोसिस, सूजन या ब्लोटिंग जैसी बीमारियों का पता लगाया जा सकता है।
रीढ़ की हड्डी और नसों की समस्या होना- इस स्कैन रीढ़ की हड्डी, डिस्क और आसपास की नसों की स्थिति को देखा जाता है. स्लिप डिस्क, नस पर दबाव, स्पाइनल कॉर्ड की समस्या और रीढ़ से जुड़ी परेशानियों के लिए टेस्ट फायदेमंद हो सकता है।
मांसपेशियों की चोट लगाना- घुटने, कंधे, कलाई और जोड़ों में चोट या दर्द होने पर एमआरआई कराया जा सकता है. इससे लिगामेंट, टेंडन, कार्टिलेज और मांसपेशियों में हुई चोट का पता लगाने में मदद मिलती है. खिलाड़ियों में स्पोर्ट्स इंजरी की जांच के लिए भी एमआरआई का इस्तेमाल किया जाता है।
शरीर में ट्यूमर या कैंसर का पता लगाना- एमआरआई से शरीर के कुछ हिस्सों में मौजूद गांठ या ट्यूमर की पहचान करने में मदद मिल सकती है. डॉक्टर इसका इस्तेमाल ट्यूमर और आसपास के टिश्यू पर उसके इफेक्ट को समझने के लिए कर सकते हैं।
CT Scan क्या है और क्यों कराया जाता है ?
जब शरीर बहुत खामोशी से बहुत कुछ कहता है तो सीटी स्कैन किया जाता है. इससे पहले डॉक्टर कई तरह के टेस्ट कराने की सलाह दे चुका होता है. जब उन टेस्ट में कुछ नहीं पता चलता और शरीर खामोशी से किसी बीमारी को पनाह दे रहा होता है. एक्स-रे की तुलना में CT Scan शरीर के अलग-अलग हिस्सों की ज्यादा डिटेल इमेज तैयार कर सकता है. डॉक्टर इन तस्वीरों की मदद से बीमारी या चोट की पहचान करने के साथ-साथ इलाज क्या करना है, यह पता करते हैं।
सीटी स्कैन में एक्स-रे और कंप्यूटर तकनीक का इस्तेमाल करके शरीर के अंदर के हिस्सों की क्रॉस-सेक्शनल फोटो तैयार की जाती हैं. इसके लिए शरीर को मशीन में डाला जाता है और चारों तरफ घुमाकर तस्वीरें ली जाती हैं. इन तस्वीरों को कंप्यूटर प्रोसेस करके शरीर के अंदर के हिस्सों की इमेज निकाली जाती है.सीटी स्कैन की जरूरत कई अलग-अलग बीमारियों में पड़ सकती है. डॉक्टर इसे मरीज के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और दूसरे टेस्ट के आधार पर लिख सकते हैं. खासकर शरीर के अंदर चोट, सूजन, ब्लीडिंग, गांठ या किसी दूसरी बीमारी का पता लगाने के लिए करते हैं।

